जज्बा: देवनाथ का संकल्प; साइकिल पर नशे, आत्महत्या के खिलाफ जंग, सात हजार किमी का कर चुके सफर
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के वापी देवनाथ साइकिल पर सवार होकर नशे के खिलाफ संदेश दे रहे हैं। देवनाथ बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों के खिलाफ भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
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त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के वापी देवनाथ साइकिल पर सवार होकर नशे के खिलाफ संदेश दे रहे हैं। देवनाथ बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों के खिलाफ भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं। देवनाथ ने संकल्प लेते हुए साइकिल पर सवार होकर नशे और आत्महत्या के खिलाफ जंग छेड़ी है। पिछले करीब एक साल से उनकी यह मुहिम जारी है। अब तक करीब सात हजार किमी का सफर तय कर चुके हैं। 12 फरवरी 2025 को देवनाथ साइकिल पर सवार होकर अगरतला से रवाना हुए। इस दौरान राजस्थान, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में नशे और आत्महत्या के खिलाफ अलख जगा चुके हैं। देवनाथ यात्रा के दौरान स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हैं। शुक्रवार को वह शिमला के ठियोग पहुंचे और युवाओं और ग्रामीणों को जागरूक किया। देवनाथ यहां से रामपुर होते हुए काजा तक जाएंगे।
अपने पर भरोसा रखिए, धीरे चलिए, रुकिये मत
उनका संदेश साफ है... अपने ऊपर भरोसा रखिए, धीरे चलिए, लेकिन रुकिये मत। परिस्थितियां कैसी भी हों हार मत मानिए। हिमालयी क्षेत्रों से गुजरते हुए वापी पहाड़ों की बिगड़ती हालत को देखकर भी चिंतित है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि विकास के नाम पर प्रकृति का अंधाधुंध दोहन रोकें और पहाड़ों को बचाने में अपना योगदान दें।
पेशे से एडिटर और सिनेमाटोग्राफर वापी देवनाथ इससे पहले भी असंभव सी लगने वाली यात्राएं कर इतिहास रच चुके हैं। उन्होंने साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचकर ऐसा करने वाले पहले भारतीय होने का गौरव हासिल किया है। वह अगरतला से सियाचिन बेस कैंप तक साइकिल से पहुंचे और एक रात सियाचिन बेस कैंप पर बिताकर देश के सैनिकों के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया। देवनाथ का मानना है कि नशा समाज की सबसे बड़ी बुराई है। युवा पीढ़ी इसकी चपेट में है।