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मणिमहेश यात्रा: कोरोना काल में राधाष्टमी पर चुनिंदा लोगों ने ही लगाई डल झील में डुबकी
Tue, 25 Aug 2020 06:37 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, भरमौर (चंबा)
अमर उजाला नेटवर्क, भरमौर (चंबा)
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 25 Aug 2020 06:37 PM IST
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डल झील, मणिमहेश
- फोटो : अमर उजाला
सदियों से चली आ रही पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान पहली बार चुनिंदा लोगों ने राधाष्टमी के बड़े शाही स्नान में डुबकी लगाई। इस बार मणिमहेश यात्रा में परंपराओं से जुड़े लोगों ने ही हिस्सा लिया और स्नान किया। कोरोना महामारी के बीच राधाष्टमी के बड़े शाही स्नान का मुहूर्त मंगलवार 12:12 बजे से बुधवार सुबह 10:40 तक रहेगा। त्रिलोचन महादेव के वंशज शिव चेलों ने मंगलवार दोपहर 12:12 बजे डल झील को पार करने की रस्म पूरी की, जिसके बाद पूरा कैलाश पर्वत शिव के जयकारों से गूंज उठा।
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शिव चेलों के झील पार करने (डल तोड़ने) की रस्म अदा होने के बाद दिन में ही अन्य शिव भक्तों ने पवित्र डल में डुबकी लगाकर वापसी की। इससे पूर्व दोपहर को डल झील की तीन बार परिक्रमा करने के बाद शिव चेले अपने निर्धारित स्थान पर आकर बैठ गए और डल तोड़ने की रस्म आरंभ हुई। कार्तिक स्वामी के चेले ने शिव चेलों की अगुवाई की। एसडीएम भरमौर मनीष सोनी ने बताया कि इस बार यात्रा की परंपराओं को निभाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनिंदा लोगों को ही मणिमहेश जाने की अनुमति दी गई है। कोरोना महामारी के चलते इस बार यात्रा का स्वरूप बदला है।
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सोमवार को मणिमहेश के लिए निकले थे कार्तिक स्वामी के गुर
मणिमहेश के बडे़ शाही स्नान के लिए कुगति से कार्तिक स्वामी के गुर कार्तिक के चिन्ह लेकर सोमवार को मणिमहेश के लिए निकल पड़े थे। सोमवार शाम को धन्छौ में शिव चेले, चरपटनाथ चंबा, दशनामी अखाड़ा की छड़ी व कुगति के कार्तिक स्वामी के गुर रात को डेरा डालने के बाद मंगलवार को डल झील पहुंचे। शुभ मुहूर्त के अनुसार कार्तिक स्वामी चेले की अगुवाई करने के साथ शिव चेलों ने डल झील तोड़ने की परंपरा का निर्वहन किया।
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