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Shinkula Pass Road: मनाली से अब दस घंटे पहले कारगिल पहुंच जाएगी सेना, बीआरओ ने अपने नाम की एक और उपलब्धि
Fri, 01 Jul 2022 11:08 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)
संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 01 Jul 2022 11:08 PM IST
सार
मनाली-दारचा-शिंकुला-कारगिल मार्ग पर पहली बार भारी वाहनों की आवाजाही शुरू कर सीमा सड़क संगठन ने एक और कीर्तिमान स्थापित किया है। समुद्रतल से 16580 फीट ऊंचे शिंकुला दर्रा होकर भारी वाहनों की आवाजाही शुरू होने से अब सेना का काफिला भी इस रूट से सरहद की तरफ जा सकेगा।
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शिंकुला दर्रा होकर भारी वाहनों के काफिले को दिखाई झंडी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
मनाली से होकर अब दस घंटे पहले ही भारतीय सेना कारगिल पहुंच जाएगी। देश के सबसे ऊंचे दर्रों में शुमार शिंकुला दर्रा होकर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली-दारचा-शिंकुला-कारगिल मार्ग पर पहली बार बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। शिंकुला होकर सेना को कारगिल तक पहुंचने में अब लगभग 200 किलोमीटर कम सफर करना पड़ेगा। सेना के वाहनों को कारगिल पहुंचने के लिए अब मनाली-लेह मार्ग होकर चार दर्रे पार भी नहीं करने पड़ेंगे।
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मनाली-दारचा-शिंकुला-कारगिल मार्ग पर पहली बार भारी वाहनों की आवाजाही शुरू कर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। समुद्रतल से 16580 फीट ऊंचे शिंकुला दर्रे से होकर वाहनों की आवाजाही शुरू होने से अब सेना के वाहन भी इस रूट से जल्द सरहद तक पहुंच सकेंगे। जहां मनाली-लेह-कारगिल रूट की लंबाई 732 किलोमीटर है, वहीं मनाली-दारचा-शिंकुला-कारगिल रूट की लंबाई 532 किलोमीटर है। इस तरह शिंकुला से होकर कारगिल जाने में 200 किलोमीटर का सफर घटेगा। वाहन दूसरे मार्ग की अपेक्षा शिकुंला से होकर जाएंगे तो कारगिल पहुंचने में 21 के बजाय 11 घंटे ही लगेंगे।
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बीआरओ की योजक परियोजना के मुख्य अभियंता जितेंद्र प्रसाद ने शुक्रवार को ऑफिसर कमांडिंग 126 आरसीसी के मेजर अरविंद के साथ शिंकुला दर्रा होकर भारी वाहनों के काफिले को झंडी दिखाकर रवाना किया। दारचा-पदुम-कारगिल से अब सेना के भारी-भरकम वाहन दौड़ने से सीमा पर तैनात भारतीय सेना को और मजबूती मिलेगी। शिंकुला होकर बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू होने से लद्दाख का जंस्कार क्षेत्र टूरिस्ट स्पॉट बन जाएगा, जिससे यहां के लोगों की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए शिंकुला दर्रे के नीचे टनल का निर्माण जल्द शुरू होगा। सैलानियों की सुविधा के लिए दर्रे के समीप बीआरओ कैफे का निर्माण करने जा रहा है। जंस्कार के लोगों की मांग पर शिंकुला दर्रे में स्तूप का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 126 आरसीसी ने 16580 फीट की ऊंचाई पर ठंड और कठोर मौसम के बीच दिन में कई घंटों तक काम किया।
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