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Shimla: वैधानिक प्रक्रिया नहीं अपनाने पर आनी को नगर पंचायत बनाने की अधिसूचना रद्द, हाईकोर्ट ने दिया फैसला

Sat, 15 Oct 2022 08:25 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 15 Oct 2022 08:25 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू जिला के आनी को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने के प्रदेश सरकार के निर्णय को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की 27 अक्तूबर 2020 की अधिसूचना को असांविधानिक करार दिया है। 

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Notification of making Ani as Nagar Panchayat canceled for not adopting legal process, High Court gave decisio
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू जिला के आनी को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने के प्रदेश सरकार के निर्णय को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की 27 अक्तूबर 2020 की अधिसूचना को असांविधानिक करार दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नगर पंचायत की स्थापना न तो कार्यपालिका का कार्य है और न ही प्रशासनिक का, बल्कि यह एक विधायी प्रक्रिया है। वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में  किए गए सरकार के कार्य में कोई न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। हालांकि यदि वैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया जाता है तो जाहिर तौर पर अधिसूचना से नगर पंचायत की घोषणा नहीं की जा सकती है। आनी को नगर पंचायत बनाने से प्रभावित आनी तहसील की पांच पंचायतों ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि ग्राम पंचायत से गांवों को निकालकर अवैध रूप से नगर पंचायत आनी का निर्माण किया है।

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उपायुक्त कुल्लू ने अपनी मर्जी से ही आनी को नगर पंचायत बनाने की सिफारिश की थी, जबकि किसी भी पंचायत ने इसके गठन के लिए कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया था। 25 अगस्त 2020 को जारी अधिसूचना के अनुसार छह सप्ताह के भीतर आपत्ति/सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इस मामले में प्रभावित पंचायतों ने आपत्तियां दर्ज की, लेकिन उन पर विचार नहीं किया गया। 27 अक्तूबर 2020 को जारी अधिसूचना के तहत नगर पंचायत आनी का गठन किया गया।अदालत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश नगरपालिका अधिनियम के तहत किसी भी स्थानीय क्षेत्र को नगरपालिका क्षेत्र में जोड़ने के लिए राज्य सरकार को अधिसूचना जारी करना जरूरी है। यदि और क्षेत्र को शामिल किया जाना है तो सरकार को अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए न्यायालय ने पाया कि नगर पंचायत आनी का गठन करते समय सरकार ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।  

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मृकुला देवी मंदिर की पौराणिक नक्काशी बदलने पर अधीक्षण पुरातत्वविद तलब 

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मृकुला देवी मंदिर की पौराणिक नक्काशी बदलने पर अधीक्षण पुरातत्वविद को तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने स्पष्टीकरण के लिए सोमवार को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं। केंद्र सरकार ने इस मामले के रिपोर्ट पेश की है।  केंद्र सरकार ने रिपोर्ट के माध्यम से अदालत को बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए ठेकेदार को काम सौंपा गया है। मंदिर की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। कोर्ट मित्र ने अदालत को बताया कि मरम्मत करते समय मंदिर की पौराणिक नक्काशी बदली जा रही है। मंदिर के अंदर के हिस्से की मरम्मत नहीं की गई है। हालांकि, अंदर से मंदिर की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने मंदिर को मरम्मत के लिए ठेकेदार के हवाले किया है। ठेकेदार अपनी मर्जी से मरम्मत कार्य कर रहा है, जिससे पौराणिक नक्काशी नष्ट की जा रही है। 


अदालत ने मंदिर भवन के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को विशेष टीम गठित करने के आदेश दिए थे। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुल्लू ने माता मृकुला देवी मंदिर की जर्जर स्थिति को हाईकोर्ट के समक्ष रखा था। रिपोर्ट में बताया गया था कि मंदिर के दोनों हिस्सों के बीच की छत झुकी हुई है। लकड़ी का एक पुराना खंभा फट रहा है। छत का बाहरी हिस्सा भी गिर रहा है। मंदिर का रंग पुरातत्व विभाग ने फिर से रंगने के लिए हटा दिया था, लेकिन उसके बाद मंदिर को बिलकुल भी रंग नहीं किया गया। मंदिर के रखरखाव का जिम्मा वर्ष 1989 से पुरातत्व विभाग के पास है। विभाग ने मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है।  

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