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राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस: आईजीएमसी शिमला में न्यूरोलॉजी विभाग को 10 साल से अकेले चला रहे डॉ. सुधीर
Fri, 01 Jul 2022 05:00 AM IST
Krishan Singh
सुमित ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
सुमित ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 01 Jul 2022 05:00 AM IST
सार
ओपीडी के अलावा आपातकाल में डॉ. सुधीर मरीजों को अपने कमरे में आने से कभी नहीं रोकते और पूरी सेवा भाव से इनकी जांच करते हैं। हालांकि कोरोना के चलते अब हालात बदले हैं।
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डॉ. सुधीर शर्मा
- फोटो : संवाद
विस्तार
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) अस्पताल शिमला में एक चिकित्सक ऐसे भी हैं जो पिछले दस साल से न्यूरोलॉजी विभाग अकेले चला रहे हैं। हफ्ते में दो बार इनकी ओपीडी चलती है, इन दो दिनों में डॉ. सुधीर शर्मा 300 मरीजों को अकेले देखते हैं। इसके अलावा बाकी दिनों में दिमाग से जुड़ी बीमारियों के टेस्ट करते हैं। यह सुबह 8:00 बजे अस्पताल पहुंच जाते हैं। वैसे तो इनकी ड्यूटी अपराह्न 4:00 बजे तक होती है, लेकिन मरीजों को देखते हुए रात भी हो जाती है। विभाग का पूरा जिम्मा इनके पास है। ओपीडी के अलावा आपातकाल में डॉ. सुधीर मरीजों को अपने कमरे में आने से कभी नहीं रोकते और पूरी सेवा भाव से इनकी जांच करते हैं।
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हालांकि कोरोना के चलते अब हालात बदले हैं। हालांकि आईजीएमसी के न्यूरोलॉजी विभाग में चिकित्सकों के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन तीन पद दस साल से खाली हैं। अस्पताल में प्रदेश भर से मरीज माइग्रेन, मिर्गी, पक्षाघात, पार्किंसन और भूलने की बीमारी का इलाज करवाने पहुंचते हैं। शिमला के जुन्गा के रहने वाले डॉ. सुधीर ने इससे पहले पीजीआई चंडीगढ़ में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर सेवाएं दीं। वह हिमाचल में सेवाएं देना चाहते थे, ऐसे में जब आईजीएमसी के न्यूरोलॉजी विभाग में आवेदन मांगे तो उन्होंने तुरंत आवेदन किया। डॉ. सुधीर कहते हैं कि पहाड़ी क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं का कई बार अभाव रहता है। उनकी इच्छा थी कि वह ऐसी जगह सेवाएं दे जहां पर मरीजों को चिकित्सा सुविधा की दरकार रहती है।
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