MC Shimla Election: पंचायत उपचुनाव के साथ ही दो मई को होंगे नगर निगम शिमला के चुनाव, जानें पूरा कार्यक्रम
राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार शाम को नगर निगम चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। चुनाव की घोषणा के साथ ही राजधानी में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
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हिमाचल प्रदेश के नगर निगम शिमला के चुनाव का एलान हो गया है। पंचायत उपचुनाव के साथ ही 2 मई को शिमला नगर निगम के चुनाव होंगे। 4 मई को इसके नतीजे आएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार शाम नगर निगम चुनाव की घोषणा कर दी है। चुनाव की घोषणा के साथ ही राजधानी में आचार संहिता भी लागू हो गई है। वहीं, नगर निगम पालमपुर के वार्ड-दो में भी दो मई को ही उपचुनाव होंगे।
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार 6 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। मतदाता सूचियों को लेकर आई सभी आपत्तियों और दावों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। सबसे पहले वार्ड वाइज मतदान केंद्रों की सूची जारी होगी। इसी दिन 13 अप्रैल से नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रत्याशियों को नामांकन भरने के लिए तीन दिन का वक्त मिलेगा। 21 अप्रैल को नाम वापसी होगी। इसी दिन शाम को पार्टी चिह्न के साथ प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी।
पिछले साल जून से लंबित थे चुनाव
शिमला नगर निगम को करीब 11 महीने बाद नया सदन मिलेगा। बीते नगर निगम सदन का कार्यकाल बीते साल 17 जून को खत्म हो चुका है। इसके बाद नगर निगम चुनाव होने थे। लेकिन वार्ड पुनर्सीमांकन के विवाद के चलते चुनाव करीब 11 महीने तक लटक गए।
यह है चुनाव का पूरा शेड्यूल
मतदान केंद्र की सूची 13 अप्रैल तक जारी होगी
नामांकन पत्र भरने समय सीमा 13, 17, 18 अप्रैल 2023 (सुबह 11:00 से 3:00 बजे तक)
नामांकन पत्रों की छंटनी 19 अप्रैल 2023 (सुबह 10:00 बजे से)
नामांकन पत्रों की वापसी 21 अप्रैल, 2023 (सुबह 11:00 से 3:00 बजे तक)
पार्टी चिह्न के साथ प्रत्याशी
सूची जारी करने का समय 21 अप्रैल, 2023
मतदान 2 मई, 2023 (सुबह 8:00 से शाम 4:00 बजे तक)
मतगणना और परिणाम 4 मई, 2023 सुबह 10:00 बजे से
चुनाव प्रक्रिया पूरी करने
की समय सीमा 6 मई, 2023
जनता को मिलेगी राहत
नगर निगम चुनाव होने से शहर की जनता को राहत मिलेगी। शहर में निर्माण कार्य तो रफ्तार पकड़ेंगे ही। साथ ही आम जनता की प्रमाणपत्र हासिल करने में आ रही परेशानी भी दूर होगी। अभी पार्षद न होने के कारण स्थायी पते, चरित्र प्रमाणपत्र, बीपीएल समेत कई तरह के प्रमाण पत्र के लिए लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इस बार पार्टी चिह्न पर ही होंगे शिमला नगर निगम के चुनाव
राजधानी में होने जा रहे नगर निगम के चुनाव इस बार पार्टी चिह्न पर करवाए जाएंगे। सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है। इसके साथ ही शहर में सियासी हलचल बढ़ गई है। चुनाव मैदान में उतरने वाले सभी दावेदारों को पार्टी चिह्न दिए जाएंगे। चुनाव 2 मई को होंगे और चार मई को परिणाम आएंगे। साल 2017 में हुए नगर निगम चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं करवाए गए थे। इसके चलते कई वार्डों में दावेदारी को लेकर काफी असमंजस रहा था। निर्वाचन आयोग से अलग-अलग चुनाव चिह्न मिलने के बाद कई दावेदारों ने जनता के बीच खुद को पार्टी का दावेदार बताया था। इस बार यह असमंजस नहीं रहेगा। सरकार विधानसभा चुनाव के बाद होने जा रहे प्रदेश के इस पहले चुनाव को पार्टी चिह्न पर करवाने जा रही है।
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तीनों प्रमुख दलों ने वार्ड स्तर पर प्रत्याशी तय करने के लिए शुरुआती सर्वे शुरू कर दिया है। अब जल्द ही प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। पार्टी की ओर से जिन्हें चुनाव चिह्न मिलेंगे उनके साथ पार्टी नेता वार्डों में जाकर प्रचार में भी जुटेंगे। नगर निगम शिमला के चुनाव इस बार भी 34 वार्डों में करवाए जाएंगे। 6 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी जिसमें स्पष्ट हो जाएगा कि किस वार्ड में कितने वोटर इस बार चुनाव में मतदान करेंगे। शहर में विकासनगर, कृष्णानगर और खलीनी बड़े वार्ड हैं जबकि अपर ढली, समिट्री, कसुम्पटी शहर में छोटे वार्ड हैं जहां वोटरों की संख्या कम है। चुनाव की घोषणा के बाद सियासी दलों ने कमर कस ली है। वार्डों में बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है।
शिमला नगर निगम के चुनाव इस बार पार्टी चिन्ह पर ही करवाए जाएंगे। इसकी तैयारी शुरू हो गई है।-नरेश चौहान प्रधान मीडिया सलाहकार, मुख्यमंत्री
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नगर निगम चुनाव के आरक्षण रोस्टर को हाईकोर्ट में दी चुनौती
नगर निगम चुनाव के लिए अंतिम आरक्षण रोस्टर को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता किमी सूद ने आरक्षण रोस्टर को गैरकानूनी बताया है। इससे पहले याचिकाकर्ता ने संभावित रोस्टर को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी, जिसे सोमवार को वापस लिया गया। मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। याचिकाकर्ता ने शहरी विकास की ओर से पहली अप्रैल को जारी अधिसूचना को गैरकानूनी बताया है। आरोप लगाया गया है कि नए रोस्टर के अनुसार आरक्षण संविधान के विपरीत है।
इसके अनुसार 34 वार्डों में से 17 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किया गए हैं। दलील दी गई है कि यह बदलाव सिर्फ आरक्षित वर्ग के छह वार्डों के रोस्टर में ही हुआ है। संभावित रोस्टर में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित छह वार्डों में वह तीन वार्ड अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किए थे, जिनमें महिला जनसंख्या प्रतिशतता कम थी। अब सरकार की ओर से जारी आधिकारिक रोस्टर में अधिकतम महिला जनसंख्या प्रतिशतता वाले वार्ड अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किए हैं। इसके अलावा बाकी रोस्टर संभावित रोस्टर के अनुसार ही जारी किया है।