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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Manimahesh Yatra: Shiva devotees gathered for the small royal bath, 25 thousand took a holy dip in the holy Da

मणिमहेश यात्रा: छोटे शाही स्नान के लिए उमड़े शिव भक्त, पवित्र डल झील में 25 हजार ने लगाई आस्था की डुबकी

Fri, 19 Aug 2022 07:10 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा/भरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा/भरमौर Published by: Krishan Singh Updated Fri, 19 Aug 2022 07:10 PM IST
सार

 शुक्रवार को मणिमहेश यात्रा के दौरान छोटा शाही स्नान में करीब 25 हजार शिव भक्तों ने पवित्र डल झील में आस्था की डुबकी लगाई। गुरुवार 9:22 से शुक्रवार सुबह 11 बजे तक छोटा शाही स्नान का शुभ मुहूर्त रहा। 

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Manimahesh Yatra: Shiva devotees gathered for the small royal bath, 25 thousand took a holy dip in the holy Da
मणिमहेश में छोटा शाही स्नान। - फोटो : संवाद

विस्तार

 पवित्र मणिमहेश यात्रा शुक्रवार को आधिकारिक रूप से शुरू हो गई। पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में छोटे शाही स्नान में 25,000 शिवभक्तों ने पवित्र डल झील में डुबकी लगाई। 15 दिवसीय यात्रा 2 सितंबर तक चलेगी। पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर के डोडा, भद्रवाह, किश्तवाड़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चंबा जिला भोले के जयकारों से गूंज रहा है।

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छोटे शाही स्नान का शुभ मुहूर्त वीरवार रात 9:22 से शुक्रवार सुबह 11:00 बजे तक रहा। खराब मौसम के बीच शुरू हुई यात्रा को लेकर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस जवान, गृह रक्षक जवान, एनडीआरएफ, पर्वतारोहण संस्थान होली/भरमौर के जवानों सहित सैकड़ों स्वयंसेवी व्यवस्था संभाले हुए हैं। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। 
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खराब मौसम के चलते हुई सिर्फ चार उड़ानें
उपमंडल अधिकारी नागरिक असीम सूद ने बताया कि खराब मौसम के चलते भरमौर स्थित हैलीपैड से गौरीकुंड के लिए दो हेलीकाप्टर सिर्फ चार उड़ानें ही भर पाए। मौसम बिगड़ने से दोपहर से देर शाम तक कोई उड़ान नहीं हो पाई। चार उड़ानों से 70 शिवभक्त भरमौर से गौरीकुंड और गौरीकुंड से भरमौर पहुंचे। 
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 पतलों और स्टील की प्लेटों में परोसना होगा श्रद्धालुओं को लंगर
 पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान थर्मोकोल और चमकीली प्लेटों में लंगर परोसने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाई गई है। लंगर संचालक श्रद्धालुओं को केवल स्टील की थालियों और पारंपरिक पतलों में ही लंगर परोस पाएंगे। यात्रा के दौरान सफाई व्यवस्था को कायम रखने, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन की ओर से यह निर्णय लिया गया है। पर्यावरण संरक्षण के चलते लिए गए इस निर्णय की अवहेलना करने वाले लंगर संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उसे फिर लंगर लगाने की अनुमति नहीं मिल पाएगी। 


वैश्विक महामारी कोरोना के बाद 19 अगस्त से प्रशासनिक तौर पर यात्रा का आगाज हुआ है। हर बार यात्रा के दौरान देश-विदेश और बाहरी राज्यों से लाखों की संख्या में शिव भक्त पवित्र डल में डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं। वहीं, दूसरी और प्रशासनिक तौर पर 19 अगस्त से दो सितंबर तक चलने वाली यात्रा के दौरान शिव भक्तों को भी यात्रा के दौरान सफाई व्यवस्था बनाए रखने के बारे में अवगत करवाया जाएगा। वर्तमान समय में यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर दर्जन से अधिक लंगर लग चुके हैं। उपमंडल अधिकारी भरमौर असीम सूद ने बताया कि यात्रा के दौरान थर्मोकोल और चमकीली प्लेटों में लंगर परोसे जाने पर पाबंदी रहेगी। लंगर संचालक स्टील की प्लेटों और पत्तल में लंगर परोस सकेंगे। निर्देशों की अवहेलना करने वाले लंगर संचालक को फिर लंगर लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

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