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मंडी शिवरात्रि महोत्सव: गूरों का विवाद न सुलझा तो टूट जाएगी 400 साल पुरानी परंपरा
Sat, 13 Feb 2021 11:35 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी/गोहर
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी/गोहर
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 13 Feb 2021 11:35 AM IST
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देव कमरूनाग
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में देव कमरूनाग के गूरों (पुजारी) का विवाद न सुलझा तो चार सौ साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी। विवाद न सुलझने पर बिना गूरों के ही देवता कमरूनाग की छड़ शिवरात्रि महोत्सव में लाई लाएगी। देवता समिति ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। राजा अजबर सेन के समय सन 1705 से महाशिवरात्रि का आगाज देव कमरूनाग के मंडी पहुंचने के बाद ही होता है।
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गूर देव कमरूनाग के प्रतीक छड़ को मंडी के टारना मंदिर में स्थापित करते हैं। इसके बाद पहली जलेब निकलती है। इस बार बारिश को लेकर गूरों में छिड़े विवाद के बीच देव कमरूनाग के शिवरात्रि में पहुंचने पर संशय बना हुआ है। सर्व देवता कमेटी के प्रधान शिवपाल शर्मा ने कहा कि शुक्रवार को आदेश जारी किए हैं कि गूर हों या न हों बड़ा देव कमरूनाग के आगमन से ही मंडी शिवरात्रि का आगाज होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि देव नीति में राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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यह है मान्यता
देव कमरूनाग को बारिश का देवता माना जाता है। मान्यता है कि बारिश न होने पर लोग गूर (पुजारी) से धूप डलवा कर देवता को प्रसन्न करते हैं। अगर देव प्रसन्न हों तो बारिश-बर्फबारी होती है। अगर देवता प्रसन्न न हों तो दूसरे गूर से धूप डलवाया जाता है। बारिश होने पर पुराने गूर की कुर्सी चली जाती है। इस साल धूप देने (परते) पर भी बारिश न होने से गूरों में पद को लेकर गृह युद्ध छिड़ा है।
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देव कमरूनाग को गूर नहीं राजा लाते थे
देवता समिति के प्रधान ने कहा कि बड़ा देव कमरूनाग को नहीं राजा लेकर आते थे। देवता की नीति में कुछ लोग राजनीति घोल रहे हैं। 11 मार्च से शिवरात्रि महोत्सव का आगाज हो रहा है। इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। बड़ा देव कमरूनाग को मंडी जिले में बारिश के देवता के रूप में जाना जाता है। शिवरात्रि के बाद सबसे बड़ा सरानाहुली मेला देवता के मूल मंदिर में लगता है।