मंडी मामला: देवी-देवताओं की आड़ में चल रहा नशे का कारोबार, ऐसे हुआ खुलासा
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जिला मंडी में कुछ शातिर गूर और पुजारी देवी-देवताओं की आड़ में नशे का अवैध कारोबार कर रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ देव स्थलों को नशे का अड्डा बनाकर इस्तेमाल किया जाता है।
कुछ लोगों का दावा है कि सरकाघाट के गांव में धरे गए आरोपियों में कई नशे के आदी हैं, इन पर अलग से जांच होनी चाहिए। यही नहीं, देवी-देवताओं का पंजीकरण कराने का नियम बनाकर पंजीकृत पुजारी नियुक्त करने की भी मांग उठी है। लोगों ने मूल माहू नाग मंदिर को प्रशासन के अधीन करके सरकार से निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।
उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि सरकार से निर्देश मिलने के बाद इस संदर्भ में प्रशासन विचार करेगा। उधर, जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो ऐसी घटना न होती।
मंदिरों को अधिकृत करे सरकार : राजपूत सभा
आईजीपी सेंट्रल रेंज मंडी एन. वेणूगोपाल ने कहा कि देवी-देवताओं के नाम पर ऐसे सामाजिक तत्वों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। कानून सबके लिए बराबर है। जो कानून का उल्लंघन करेगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने मानवता को शर्मसार किया है। एसपी मंडी को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। देवी देवताओं के नाम पर नशाखोरी फैलानी की बात भी सामने आ रही है। इस पर भी पुलिस जांच कर रही है।
राजपूत महासभा के प्रदेश संगठन सचिव शिवकुमार वर्मा ने सरकार से घुमंतू देवी-देवताओं पर शिकंजा कसने और मंदिरों को अधिकृत करने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक भावनाओं की आड़ में कुछ स्वार्थी लोग समाज में अंधविश्वास फैलाने में लगे हैं। देवता का डर दिखाकर लोगों को लूट रहे हैं। सरकार मंदिरों को अपने अधीन लेकर पुजारी नियुक्त करे ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सके।