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शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के पक्ष में नहीं थे महात्मा गांधी, जानें कई और रोचक बातें
Wed, 12 May 2021 10:54 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 12 May 2021 10:54 AM IST
सार
आज से ठीक 100 साल पहले यानी 12 मई के दिन महात्मा गांधी पहली बार शिमला आए थे। उन्होंने यहां क्या किया, कहां ठहरे, यहां पर स्वतंत्रता आंदोलन की अलख उन्होंने किस तरह जलाई और शिमला के बारे में उनका क्या विचार था।
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शिमला में महात्मा गांधी(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिमाचल प्रदेश के शिमला को देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने इसे लेकर अंग्रेजों को खूब कोसा था। क्योंकि दूरदराज क्षेत्र होने के कारण यहां सुविधाओं की कमी थी और यहां से इतने बड़े देश का ध्यान रखना मुश्किल काम मानते थे। इसे अंग्रेजों की आरामपरस्ती और फिजूलखर्ची की जगह मानते थे। यह दावा विनोद भारद्वाज की पुस्तक ‘गांधी इन शिमला’ में किया गया है। इसे राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग के राज्य अभिलेखागार की ओर से छापा गया है। किताब को जल्द प्रकाशित किया जाएगा।
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आज से ठीक 100 साल पहले यानी 12 मई के दिन महात्मा गांधी पहली बार शिमला आए थे। उन्होंने यहां क्या किया, कहां ठहरे, यहां पर स्वतंत्रता आंदोलन की अलख उन्होंने किस तरह जलाई और शिमला के बारे में उनका क्या विचार था। इस किताब में ऐसे तमाम सवालों के जवाब हैं। 264 पृष्ठों की इस पुस्तक में पुराने चित्र और अभिलेख भी हैं। विनोद भारद्वाज सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में वरिष्ठ संपादक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में हिमप्रस्थ का अंक भी महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं पर निकाला था।
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विनोद के अनुसार महात्मा गांधी का शिमला से रिश्ता स्वतंत्रता संग्राम के गति पकड़ने के साथ-साथ बढ़ता गया। वह तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी में वायसराय व उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत और बैठकों के लिए आते रहे। 1921 के बाद 1931 में तीन, 1939 व 1940 में दो-दो बार, 1945 में एक बार व अंतिम बार 1946 में पधारे। वह कभी भी एक पर्यटक की माफिक छुट्टियां बिताने नहीं आए। पहली बार वह 12 मई, 1921 को कालका-शिमला रेल मार्ग से यात्रा कर समरहिल स्टेशन पर उतरे थे।
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उनके साथ उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी, खिलाफत आंदोलन के नेता मौलाना मोहम्मद अली, शौकत अली, पंजाब केसरी लाला लाजपतराय, लाला दुनी चंद अंबालवी आदि शिमला आए थे। महात्मा गांधी ने 22 मई, 1921 को नवजीवन में गुजराती में शिमला पर ‘पांच सौवीं मंजिल’ शीर्षक से एक लेख लिखा। उन्होंने इस शहर के नामकरण, शिमला को गुलामी की निशानी, रिक्शे का उपयोग, व्यर्थ में धनराशि का दुरुपयोग आदि के बारे में लिखा कि शिमला में बहुत ज्यादा आबादी हो गई है। सारे घर भर गए हैं। महंगाई तो होगी ही। पानी भी दो-एक हजार फीट नीचे से आता है। लोटा भर पानी इस्तेमाल करते हुए भी शर्म आती है।