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Literature Festival: भ्रूण हत्या की तरह भारत में कन्वर्जन थेरेपी भी हो बैन, साहित्य उत्सव में लेखकों ने उठाई मांग

Sat, 18 Jun 2022 11:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 18 Jun 2022 11:00 AM IST
सार

 शुक्रवार को शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में लैसबियन, गे, बायो सेक्सुअल, ट्रांसजेंडर लेखकों ने कन्वर्जन थेरेपी पर भी प्रतिबंध की  मांग उठाई। इस अवसर पर थर्ड जेंडर समुदाय को दुर्गा माता की तीसरी आंख का नाम भी दिया। 

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Like feticide, conversion therapy should also be banned in India, writers raised demand in literature festival
ट्रांसजेंडर लेखकों ने अपने अनुभव साझा किए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 भ्रूण हत्या की तरह भारत में कन्वर्जन थेरेपी पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए। शुक्रवार को शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में लैसबियन, गे, बायो सेक्सुअल, ट्रांसजेंडर लेखकों ने यह मांग उठाई। इस अवसर पर थर्ड जेंडर समुदाय को दुर्गा माता की तीसरी आंख का नाम भी दिया। अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को दोपहर के सत्र में सात ट्रांसजेंडर लेखकों ने अपने अनुभव साझा किए।

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पंजाब यूनिवर्सिटी की पहली ट्रांसजेंडर छात्रा और लेखक धनंजय चौहान ने कहा कि कन्वर्जन थेरेपी को लेकर सरकार को कड़ा फैसला लेना चाहिए। जो लैसबियन, गे, बायो सेक्सुअल, ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) की लैंगिक पहचान या फिर उनकी सेक्सुअल पसंद को बदलने की कोशिशें करते हैं, उनके खिलाफ  सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। ओडिशा भाषा की लेखक मीरा परिडा ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने श्लोक से श्लोक बनाए। इसी तरह हमारे समाज के लोगों ने अपनी जरूरतें पूरी करने और सम्मान प्राप्त करने के लिए लेखक बनने का फैसला लिया है। लोगों ने उनका कई बार मजाक उड़ाया, इसे चैलेंज लेते हुए लेखन के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का फैसला लिया है।
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भारत की पहली ट्रांसजेंडर सिविल सर्वेंट ने कहा कि अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए जागरूक होना जरूरी है। अधिकारों और कानूनी मामलों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। लेखक ऋत्विक चक्रवर्ती ने कहा कि संघर्ष सभी लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए किया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए थर्ड जेंडर से आने वाली भारत की पहली प्रधानाचार्य मानबी बंघोपाध्याय ने कहा कि जिस प्रकार साहित्य भगवान की देन है। उसी तरह ट्रांसजेंडर भी भगवान की देन है। समाज में अब बदलाव आ रहा है। जल्द ही ट्रांसजेंडर साहित्य भी आएगा।
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झुमका गिरा रे गाने पर नाचे ट्रांसजेंडर
 झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में...गाने पर ट्रांसजेंडर अपने कदम नहीं रोक नहीं पाए और रिज पर लगे मंच के आगे नाचने लगे। रिज मैदान पर दिन के समय मंच पर स्थानीय कलाकार गाना गा रहे थे। गायिका को सुनने के लिए लोग एकत्र हो गए। अचानक दो ट्रांसजेंडर भीड़ से निकल कर नाचने लगे। उसके बाद एक ट्रांसजेंडर ने मंच पर पहुंच कर गायिका को प्रोत्साहन राशि भी दी। गाना खत्म होने के बाद एक ट्रांसजेंडर ने गाना गाकर लोगों का मनोरंजन भी किया। 
 

नॉर्थ ईस्ट इंडिया में रामायण, महाभारत से हुआ हिंदू धर्म का प्रचार

गैर मान्यता प्राप्त भाषाओं में वाचिक महाकाव्य विषय को लेकर गेयटी थियेटर के मुख्य सभागार में हुई चर्चा में लेखक एम मणि मैतेई ने कहा कि उत्तर पूर्व भारत में हिंदू धर्म का प्रचार रामायण और महाभारत से ही हुआ है। भारतीय साहित्यिक विरासत को वाचिक महाकाव्य मूल्यवान बना रहे हैं। वाचिक महाकाव्य हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं। देश में कई संस्कृतियां हैं। हर संस्कृति में अलग-अलग साहित्य है। उन्होंने कहा कि 14वीं सदी में असम में रामायण को असमी भाषा में लिखा गया था।

देश के कई हिस्सों में रामायण अलग-अलग तरीके से बताई गई है। चर्चा की अध्यक्षता करते हुए लेखक महेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि लिखित साहित्य को मान्यता मिलती है, लेकिन मौखिक को नहीं। उन्होंने कहा कि भारतीय साहित्य चक्रीय है। लिखित और मौखिक का चक्र समय-समय पर घूमता रहता है। तेलुगु कवि और समालोचक एस नागमल्लेश्वर राव ने कहा कि भारत भाषायी दृष्टि से सघन और वैविध्यपूर्ण है। इनमें से प्रत्येक भाषा की अपनी विशिष्टता, इतिहास और विरासत है।

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