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kargil vijay diwas 2020: शहीद कैप्टन सौरभ कालिया नहीं ले पाए थे पहला वेतन, इंसाफ के इंतजार में परिजन

Sat, 25 Jul 2020 09:06 PM IST
अरविन्द ठाकुर विनोद राणा, अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा)
विनोद राणा, अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 25 Jul 2020 09:06 PM IST
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kargil vijay diwas 2020: Martyr Captain Saurabh Kalia story
शहीद कैप्टन सौरभ कालिया - फोटो : अमर उजाला

कारगिल युद्ध में शहीद कैप्टन सौरभ कालिया सेना में कैप्टन का रैंक हासिल करने के एक माह बाद देश के लिए शहीद हो गए थे। वे अपना पहला वेतन भी नहीं ले पाए थे। दुश्मनों की टोह लेने पर पाकिस्तानी फौज के हाथों चढ़े कैप्टन सौरभ कालिया की अमानवीय यातानाओं से शहीद होने पर उनके परिजनों को अभी इंसाफ नहीं मिला है।

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इसका उन्हें आज भी मलाल है। नौ जून 1999 को कैप्टन सौरभ कालिया का शरीर क्षत-विक्षत हालत में मिला था। परिजनों को अभी तक सरकार से कोई न्याय नहीं मिला है। इससे अब सौरभ कालिया के परिजनों की मोदी सरकार से भी आस टूटने लगी है। कैप्टन सौरभ कालिया का मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
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लेकिन पिछले दो साल से मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई है। लिहाजा, अपने शहीद बेटे को इंसाफ न मिलता देख पिता डॉ. एनके कालिया और माता विजय कालिया का दर्द फिर छलका है। 1997 में सेना में अधिकारी रैंक पर भर्ती हुआ उनका लाडला दो साल बाद ही देश के लिए शहीद हो गया था।
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पाकिस्तान सेना की ओर से उन्हें कई अमानवीय यातनाएं दी गईं थीं। जिसे लेकर शहीद कैप्टन सौरभ कालिया का परिवार इंसाफ चाहता है। कैप्टन सौरभ कालिया के पिता डॉ. एनके कालिया ने कहा कि 2014 से उन्हें मोदी सरकार से आस जगी थी कि अब उन्हें न्याय मिलेगा लेकिन सरकार ने अब तक कुछ नहीं किया।

मां ने दिया था शहीद बेटे के शव को कंधा तो रोया था पालमपुर
कारगिल युद्ध के पहले शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालिया का शव जब पालमपुर के शहीद कैप्टन विक्रम बतरा मैदान में पहुंचा था तो माता विजया कालिया ने देश की सरहद की रक्षा पर कुर्बान बेटे के पार्थिव शरीर को कंधा दिया था। यह देख सारा पालमपुर रो पड़ा था। लेकिन बेटे के क्षत-विक्षत शव को देख परिजनों के अंदर पाकिस्तान के खिलाफ भारी आक्रोश छा गया था। यह देख पिता डॉ. कालिया ने बेटे शरीर से हुए अमानवीय यातनाओं का मुद्दा उठाया था।

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