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15 वर्ष बाद मिलता है नियमितीकरण: शिक्षा विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को जेसीसी से उम्मीद
Thu, 18 Nov 2021 10:41 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 18 Nov 2021 10:41 PM IST
सार
चतुर्थ कर्मचारी संघ के मुख्य सलाहकार और पूर्व महासचिव भुट्टु राम ने कहा कि जेसीसी होने से शिक्षा विभाग मे सेवाएं देते आ रहे चतुर्थ कर्मचारियों में आस जागी है। उनका वर्ग सब कर्मचारियों से पिछड़ा वर्ग है। इस वर्ग ने 8 से 9 वर्ष पार्ट टाइम में सेवा की और फिर आठ साल के बाद दैनिक भोगी बने।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिक्षा विभाग में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का जीवन नियमितीकरण की आस में गुजर रहा है। आठ वर्षों तक पार्ट टाइम सेवाएं देने के बाद इन्हें दैनिक भोगी बनाया जाता है। इसके 15 वर्षों के बाद नियमित होने का अवसर मिलता है। शिक्षा विभाग में कार्यरत करीब आठ हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 27 नवंबर को होने वाली जेसीसी की बैठक से उम्मीदें हैं।
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अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को भी इन कर्मियों की ओर से अपनी मांगों से अवगत करवाया गया है। महासंघ के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर के स्वयं शिक्षा विभाग से होने के चलते इन कर्मियों को उम्मीद है मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में उनके मामले को जोरदार तरीके से उठाते हुए हल किया जाएगा।
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चतुर्थ कर्मचारी संघ के मुख्य सलाहकार और पूर्व महासचिव भुट्टु राम ने कहा कि जेसीसी होने से शिक्षा विभाग मे सेवाएं देते आ रहे चतुर्थ कर्मचारियों में आस जागी है। उनका वर्ग सब कर्मचारियों से पिछड़ा वर्ग है। इस वर्ग ने 8 से 9 वर्ष पार्ट टाइम में सेवा की और फिर आठ साल के बाद दैनिक भोगी बने। शिक्षा विभाग में खाली पद नहीं होने से 15 से 16 वर्ष के बाद नियमित होने का लाभ मिलता है।
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प्रदेश में करीब आठ हजार चतुर्थ कर्मचारी सेवा दे रहे हैं। करीब 7500 चतुर्थ कर्मचारी पेंशन से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1997 की नीति से लगे पार्ट टाइम, दैनिक भोगी और नियमित सेवादार 60 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं। 10 मई 2001 के बाद लगे पार्ट टाइम, दैनिक भोगी, नियमित सेवादार को 58 वर्ष में ही सेवानिवृत्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि एक ही काम और एक ही दाम पर इन दोनों वर्गों को अलग-अलग किया गया है।
इन मांगों पर सरकारी मंजूरी चाहते हैं चतुर्थ कर्मचारी
चतुर्थ कर्मचारी को 60 वर्ष की आयु होने पर सेवानिवृत्त किया जाए। 10 मई 2001 की शर्त को हटाया जाए।
तीन वर्ष बाद प्रयोगशाला परिचर कर्मचारी बनाया जाए। प्रदेश में करीब तीन हजार प्रयोगशाला परिचर के पद खाली हैं।
एलडीआर में 20 फीसदी चतुर्थ कर्मचारी को कमीशन का कोटा दिया जाए।
कर्मचारियों की पेंशन बहाल की जाए, ताकि बुढ़ापे में सहारा मिल सके।