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Jail Bharo Andolan: शिमला से इस दिन शुरू होगा किसानों-बागवानों का जेल भरो आंदोलन

Tue, 16 Aug 2022 09:37 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 16 Aug 2022 09:37 PM IST
सार

मांगों को लेकर किसान-बागवान गिरफ्तारियां देंगे। 20 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी से नाराज संयुक्त किसान मंच ने सरकार को 1987 और 1990 की तर्ज पर आंदोलन की चेतावनी दी है। 

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Jail Bharo Andolan of farmers apple growers will start from Shimla on this day
संयुक्त किसान मंच अध्यक्ष व उपाध्यक्ष। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संयुक्त किसान मंच के आह्वान पर बुधवार को शिमला में किसानों और बागवानों का जेल भरो आंदोलन शुरू होगा। मांगों को लेकर किसान-बागवान गिरफ्तारियां देंगे। 20 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी से नाराज संयुक्त किसान मंच ने सरकार को 1987 और 1990 की तर्ज पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा है कि 1987 के किसान-बागवान आंदोलन के बाद वीरभद्र सिंह अगली बार मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे। 1990 के आंदोलन के बाद शांता कुमार दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। इस बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर किसानों और बागवानों की नाराजगी मोल ले रहे हैं। 28 जुलाई को हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने संयुक्त किसान मंच की सभी मांगों को जायज करार दिया था और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर सभी मांगें हल करने का आश्वासन दिया था। 

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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनी लेकिन किसान बागवानों को सदस्य नहीं बनाया गया। सरकार भ्रम फैलाने के लिए घोषणाएं कर रही हैं। निजी कंपनियों के सेब खरीद रेट तय करने के लिए मुख्य सचिव ने नौणी विश्वविद्यालय के वीसी की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की घोषणा की लेकिन कमेटी गठित करने से पहले ही अडाणी सहित अन्य कंपनियों ने रेट घोषित कर दिए। सरकार कॉरपोरेट घरानों के आगे नतमस्तक हो गई है। किसान बागवानों के हितों को ताक पर रख दिया गया है। अडाणी के इशारों पर सरकार काम कर रही है। सरकार की लापरवाही की नींद तोड़ने के लिए जेल भरो आंदोलन शिमला से शुरू किया जा रहा है। जब तक मांगे पूरी नहीं होती आंदोलन जारी रहेगा।
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सेब के बकाया भुगतान के लिए बार-बार लग रहे शिमला के चक्कर
 प्रदेश के सेब बागवानों को करोड़ों रुपये की बकाया राशि लेने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। राज्य सरकार की घोषणा के बाद भी बागवानों को एक साल बाद भी सेब के पैसों का भुगतान नहीं हो रहा है। सरकार ने मंडी मध्यस्थता योेजना (एमआईएस) में खरीदे सेब की बीस करोड़ की राशि बागवानों को देनी है। प्रदेश सरकार ने चालू सीजन में भी मंडी मध्यस्थता योजना में सेब खरीदा जाने लगा है जबकि बागवानों को पूरी राशि नहीं दी जा रही। छोटे बागवानों कोे छोटी रकम लेने के लिए भी शिमला हिमफेड के दफ्तर में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हिमफेड ने उन बागवानों को बकाया राशि देने का फैसला लिया है, जिनको 50,000 रु पये से कम का भुगतान होना है। इससे अधिक के भुगतान के लिए बागवानों को थोड़ा और इंतजार करना होेगा। 
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हिमाचल प्रदेश फल और सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि हिमफेड छोटे बागवानों को भी शिमला में छोटी राशि के भुगतान के लिए चक्कर कटवा रहा है। कई बागवानों की 3,000 से 5,000 रुपये की बकाया राशि है। एचपीएमसी के महा प्रबंधक हितेष आजाद ने कहा कि सभी शाखा प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने क्षेत्रों में बागवानों के एमआईएस में खरीदे सेब की बकाया राशि का भुगतान कर दें। हिमफेड अध्यक्ष गणेश दत्त ने कहा कि बागवानों को 50,000 रुपये से कम की राशि का भुगतान प्राथमिकता में किया जा रहा है, अन्य बागवानों को बाद में भुगतान किया जाएगा। 
 

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