Literature Festival Shimla: गीतांजलि श्री विशेष बातचीत में बोलीं- केवल ‘रेत समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ने ही दिलाया बुकर पुरस्कार, ऐसा नहीं
अपने हिंदी उपन्यास ‘रेत समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘टोंब ऑफ सैंड’ के लिए मिले ‘अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2022’ की मौलिकता पर अंगुलियां उठाने वालों को गीतांजलि श्री ने दो टूक जवाब दिया कि लियो टॉलस्टॉय के उपन्यास की अन्ना केरेनिना हर भाषा में वही रहेगी, यह बदलेगी नहीं।
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मेरे उपन्यास ‘रेत समाधि’ के केवल अनुवाद ने ही मुझे अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार दिलाया है, ऐसा नहीं है। अपने हिंदी उपन्यास ‘रेत समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘टोंब ऑफ सैंड’ के लिए मिले ‘अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2022’ की मौलिकता पर अंगुलियां उठाने वालों को गीतांजलि श्री ने दो टूक जवाब दिया कि लियो टॉलस्टॉय के उपन्यास की अन्ना केरेनिना हर भाषा में वही रहेगी, यह बदलेगी नहीं। ठीक वैसे ही उनका उपन्यास भी है। लंदन में इस पुरस्कार के मिलने के बाद एकाएक चर्चा में आई हिंदी की लेखिका गीतांजलि श्री अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के समापन दिवस पर शिमला आईं।
उन्होंने यहां ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में ‘भारतीय भाषाओं में महिला लेखन’ पर परिचर्चा में भाग लिया। इससे पहले अमर उजाला ने उनसे विशेष बातचीत की। उनसे जब पूछा गया कि कहा जा रहा है कि डेजी रॉकवेल के अनुवाद ने कमाल कर दिया, इसी से उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला, इस पर क्या कहती हैं? इस पर गीतांजलि श्री ने कहा कि इस बारे में जो जैसा सोच रहा है, वही जाने। लेकिन जब लियो टॉलस्टॉय के उपन्यास ‘अन्ना केरेनिना’ को किसी भाषा में पढ़ते हैं तो इससे यह तो नहीं होगा कि उससे ‘अन्ना केरेनिना’ बदल जाएगी। ये जरूर हो सकता है कि अनुवाद कई बार अच्छा नहीं होता है।
अनुवाद अच्छा होगा तो वह तो ठीक होता ही है। भाषा और शिल्प का ढर्रा तोड़ने पर उठ रहे सवाल पर उन्होंने जवाब दिया कि इस बारे में उन्हें खुद को डिफेंड करने की जरूरत नहीं है। जो ऐसा कह रहे हैं, उन्हीं से बात करें। वह अपना काम कर रही हैं। इस बारे में आलोचकों से बात की जाए। इस तरह की बात करने का काम पाठक या आलोचक ही करते हैं। हिमाचल प्रदेश में हिंदी साहित्य की स्थिति से उन्होंने अपरिचय ही जताया और कहा कि लिखने वाले हैं, मगर ज्यादा लोगों से ठीक से परिचय नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि वह शिमला में काफी आती रहती हैं, मगर अभी बहुत समय बाद आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी अवार्ड एक पहचान होती है। यह पहचान देता है। उस पल के लिए रोशनी फेंकता है। इधर देखिए, आप जब उधर देखेंगे तो आप पाएंगे कि आप भी अकेले नहीं हैं। आप जिस जमीन से उपजे हैं, उसी जमीन से बहुत सी कृतियां उपजती हैं। हम न कि उस बुकर को देखते रहें, जहां से रोशनी फेंकी गई है।