Himachal: निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे के मामले में दोनों जजों में नहीं बनी सहमति, अब तीसरा जज सुनेगा मामला
हिमाचल के तीन निर्दलीय विधायकों को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। निर्दलियों की याचिका पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। तीन निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे के मामले में दोनों जजों में सहमति नहीं बनी। दोनों के अलग-अलग मत होने की वजह से अब इस मामले को तीसरे न्यायाधीश सुनेंगे।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में तीन निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे के मामले में दोनों जजों में सहमति नहीं बनी। दोनों के अलग-अलग मत होने की वजह से अब इस मामले को तीसरे न्यायाधीश सुनेंगे। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 30 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर बुधवार को निर्णय आया। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने इस मामले को सुना।
याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव ने अपने फैसले में कहा कि इस्तीफा स्वीकार करना विधानसभा अध्यक्ष का संवैधानिक अधिकार है। संविधान की धारा-190 (3) बी के तहत और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के नियम-287 के अंतर्गत विधानसभा अध्यक्ष को शक्तियां दी गई हैं। इसके तहत वह कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं, न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने अपने फैसले में कहा कि विधानसभा अध्यक्ष तीन निर्दलियों के इस्तीफे पर चार हफ्ते के अंदर अपना फैसला दें। याचिकाकर्ता तीन निर्दलीय विधायक हैं। इन तीनों ने 22 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे सौंप दिए थे। विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफे मंजूर नहीं किए।
अध्यक्ष ने इस मामले में इन तीनों को नोटिस जारी किया और जवाब देने को कहा। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में चुनौती दी गई कि जब त्यागपत्र स्वेच्छा से दिए गए हैं तो स्वीकार क्यों नहीं किए गए। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष की ओर से कांग्रेस के दिग्गज नेता व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में अपनी दलीलों में कहा कि निर्दलीय विधायकों ने 22 मार्च को जब इस्तीफा सौंपा है, तब विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर उनके साथ थे। 23 मार्च को तीनों भाजपा में शामिल हो जाते हैं और 24 मार्च को चार्टर प्लेन में घूमने जाते हैं। ऐसे में इसे स्वेच्छा से दिया गया इस्तीफा कैसे माना जाएगा।
सीपीएस मामले में सरकार के अधिवक्ता गुरुवार को करेंगे बहस
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) मामले में सरकार की ओर से नियुक्त राज्यसभा सांसद व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तनखा ने बहस की। गुरुवार को सरकार की ओर से नियुक्त सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे अदालत में बहस करेंगे। अदालत ने पिछली सुनवाई में सीपीएस दर्जे के मामले को लगातार 22 से 24 अप्रैल तक सुना था। सरकार ने अदालत से गुहार लगाई थी कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त किया गया है, जो इस मामले में बहस करेंगे। अधिवक्ताओं की व्यस्तता होने की वजह से सरकार तब अपना पक्ष नहीं रख सकी थी।
#WATCH | Shimla: On the resignation of 3 independent MLAs, Himachal Pradesh High Court Advocate General Anup Kumar Rattan says, "It is my opinion that the three independent MLAs had no reason to resign. Before contesting elections, they made efforts to fight on the BJP ticket.… pic.twitter.com/FbtEo7m8LY
— ANI (@ANI) May 8, 2024