हिमाचल: मजाक बन गई अटल टनल में पुलिस की अभेद्य सुरक्षा, पढ़ें पूरा मामला
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जाहिर है कि तालमेल की कमी और रणनीति सही न होने से पुलिस के निचले स्तर के स्टाफ पर दबाव बनता है और तनाव व विषम हालात की वजह से वाहन चालक को पीटने जैसी घटना सामने आई है। खास बात यह है कि टनल की सुरक्षा व निगरानी के लिए पुलिस के कई आला अधिकारियों की एक टीम ने प्रस्ताव तैयार किया था। उधर, डीजीपी संजय कुंडू ने कहा कि अटल टनल में सेना, बीआरओ और पुलिस अलग-अलग निर्धारित टास्क को पूरा करती है। पुलिस के पास सुरक्षा और यातायात का जिम्मा है। इसे पुख्ता रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। टनल के भीतर हुई घटना की जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
सेना के लिए रीढ़ है यह टनल
हाल में चीन से बढ़ते तनाव के दौरान भारतीय सेना के लिए यह सुरंग बेहद अहम साबित हुई थी। भारी मात्रा में राशन व गोला बारूद इसी रास्ते से सेना ने सीमा तक पहुंचाया था। उद्घाटन से पहले हिमाचल पुलिस ने इसकी पुख्ता सुरक्षा का दावा किया था, लेकिन अब उसकी चेकिंग में चूक और तालमेल की कमी से टनल के अंदर ही वाहनों का जाम लग रहा है।
मारपीट वाले समय भी टनल में था अंधेरा
चालक से मारपीट का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें भी टनल में पूरी तरह अंधेरा दिख रहा था। वीडियो भी गाड़ी की हेडलाइट की रौशनी में बनाया गया है। अंधेरे के बीच टनल के अंदर लगे जाम की वजह से पुलिस को भी कार्रवाई करने में मुश्किल का सामना करना पड़ा। चूंकि, टनल के अंदर की पूरी मेंटेनेंस सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के हाथ में है। ऐसे में पुलिस इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रही है।
टनल में अंधेरा होने पर भी उठे सवाल
अटल टनल रोहतांग के भीतर वाहन चालक से मारपीट के दौरान सुरंग में अंधेरा होने पर भी सवाल उठे हैं। लोगों का कहना है कि साढ़े तीन हजार करोड़ की लागत से बनी टनल में अंधेरा होना हैरान करने वाला है। यह टनल की सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही है। इसकी भी जांच होनी चाहिए। भले ही टनल की सुरक्षा का जिम्मा हिमाचल पुलिस का है, लेकिन टनल के भीतर सुविधा का संचालन करना बीआरओ का काम है। दो दिन पहले टनल में पुलिस की ओर से की गई मारपीट के अलावा आए दिन टनल में पर्यटकों के नाचने-गाने के मामले सामने आए हैं।
डबललेन टनल में किसी भी वाहन को सुरंग में खड़ा करना सख्त मना है। जिस वक्त चालक के साथ की मारपीट कर उसे मुर्गा बनाया गया, उस दौरान टनल के भीतर अंधेरा पसरा था। बीआरओ के अधिकारी कुलदीप वशिष्ठ ने कहा कि टनल में बिजली बोर्ड की सप्लाई है। अगर कभी बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो टनल में जेनरेटर की सुविधा है। घटना के दौरान बिजली क्यों नहीं थी, इसकी बीआरओ जांच कर रहा है।