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Himachal: त्रिलोकपुर के जंगल में अवैध खैर कटान, 5000 पेड़ काटे, जड़ें तक उखाड़ ले गए

Fri, 28 Mar 2025 12:52 PM IST
Krishan Singh धर्म सिंह तोमर, संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)
धर्म सिंह तोमर, संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Fri, 28 Mar 2025 12:52 PM IST
सार

त्रिलोकपुर में वन विभाग के रेंज ऑफिसर कार्यालय व प्रसिद्ध बालासुंदरी मंदिर त्रिलोकपुर से कुछ ही दूरी पर हजारों की संख्या में जंगल से खैर के हरे भरे पेड़ काटे गए हैं।

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Illegal khair felling in Trilokpur forest, 5000 trees cut, even the roots uprooted
त्रिलोकपुर के जंगल में अवैध खैर कटान। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के  जिला सिरमौर के त्रिलोकपुर के जंगल में अवैध खैर कटान का मामला सामने आया है। यहां खैर के करीब 5,000 पेड़ काटने की आशंका है। यही नहीं, खैर माफिया जड़ें तक उखाड़ ले गया। जमीन से तीन फीट तक खोदाई कर पेड़ काटे गए हैं। यहां करीब 8 महीने से पेड़ कटान चल रहा था। इस खैर कटान में हिमाचल ही नहीं हरियाणा के ठेकेदारों का भी हाथ बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक त्रिलोकपुर में वन विभाग के रेंज ऑफिसर कार्यालय व प्रसिद्ध बालासुंदरी मंदिर त्रिलोकपुर से कुछ ही दूरी पर हजारों की संख्या में जंगल से खैर के हरे भरे पेड़ काटे गए हैं।

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पेड़ों को तीन फीट तक जमीन की खोदाई कर काटा गया है। लेकिन मौके पर पेड़ों के अवशेष व जड़ें मौजूद हैं। इसके अलावा जंगल में पेड़ काटने के बाद सैकड़ों गड्ढे बन गए हैं। सूत्रों की मानें तो यह गोरखधंधा पिछले करीब 8 महीनों से चल रहा है। यहां नियमों को ताक पर रख करीब 35 हजार बीघा भूमि पर खैर के करीब 5 हजार पेड़ों को काटकर मिलीभगत से ठिकाने लगा दिया गया है। सूत्रों के अनुसार पेड़ों को फैक्टरियों या अन्य स्थानों पर रातोंरात बेचा जा रहा है। हैरानी की बात है कि इतने बड़े स्तर पर कई महीनों से यह गोरखधंधा चल रहा है और संबंधित विभाग इस बात से बेखबर है।

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खेतों में खड़े पेड़ों के लिए ली गई अनुमति और साफ कर दिए जंगल
सूत्रों की मानें तो खैर माफिया ने खेतों या निजी भूमि से खैर काटने की अनुमति ली थी। लेकिन इसकी आड़ में जंगल से हजारों पेड़ों को काट दिया। इस पर कई सवाल खड़े होते हैं। अनुमति दिए जाने से पहले लंबी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। बता दें कि भूमि की जंगल झाड़ी किस्म से खैर आदि पेड़ों के कटान पर रोक है। इसमें चाहे भूमि मलकीयत हो या फिर सरकारी हो, खैर का पेड़ नहीं काटा जा सकता। मौजा त्रिलोकपुर में जिस भूमि में खैर कटान हुआ है, वह मलकीयत बताई जा रही है। भूमि की किस्म जंगल झाड़ी है। खैर की लकड़ी की बाजार में बड़ी मांग है। इसकी कीमत लाखों में रहती है। बताया जाता है कि एक अच्छा खैर का पेड़ एक लाख रुपये तक बिकता है। ऐसे में करोड़ों के आसपास मामला हो सकता है।

जंगल झाड़ी किस्म की भूमि, चाहे वह मलकीयत ही क्यों न हो वहां से खैर के पेड़ काटने पर पाबंदी है। मौजा त्रिलोकपुर में कई आवेदनकर्ताओं ने निजी भूमि से खैर के पेड़ काटने को लेकर अनुमति ली है। मलकीयत जंगल झाड़ी भूमि किस्म से खैर के पेड़ काटे जाने को लेकर जानकारी नहीं है।- अवनी भूषण राय, डीएफओ वन विभाग नाहन

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