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Asafoetida: बड़ी कामयाबी, देश में पहली बार आईएचबीटी ने टिशू कल्चर से तैयार किया हींग
Wed, 21 Sep 2022 11:37 AM IST
Krishan Singh
अशोक राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)।
अशोक राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)।
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 21 Sep 2022 11:37 AM IST
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हींग का पौधा।
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अमर उजाला
विस्तार
देश में पहली बार बीज के बजाय अब टिशू कल्चर से हींग की पैदावार होगी। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अधीन हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने टिशू कल्चर से हींग तैयार करने में कामयाबी पाई हैं। इस सफलता के बाद हींग के लिए भारत की अब विदेशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। भारत हर साल विदेशों से करोड़ों रुपये खर्च कर करीब 1500 टन हींग आयात करता है। अफगानिस्तान से 90, उज्जबेकिस्तान से आठ और ईरान से दो फीसदी हींग मंगवाया जाता है। टिशू कल्चर से भारत में ही अब हींग के हर साल करीब पांच लाख पौधे तैयार किए जा सकेंगे। कृषि वैज्ञानिकों ने करीब दो साल तक प्रयोगशाला में हींग के टिशू कल्चर को विकसित करने पर काम किया।
सीएसआईआर, आईएसबीटी पालमपुर के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि देश में पहली बार हींग के टिशू कल्चर विकसित किए गए हैं। देश को हींग उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर साल करीब पांच लाख पौधों की जरूरत है। अफगानिस्तान समेत कई हींग उत्पादक देशों ने तो अब इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यही कारण है कि देश के कृषि वैज्ञानिकों को प्रयोगशाला में दो साल लंबे शोध के बाद हींग के टिशू कल्चर विकसित करने में सफलता मिली है। आईएचबीटी ने अफगानिस्तान से लाए गए हींग के बीज को पनीरी में विकसित कर समुुद्रतल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लाहौल के गैमूर और क्वारिंग गांव में 17 अक्तूबर 2021 को रोपा था। करीब छह माह बाद हींग का पौधा अंकुरित होकर जमीन से बाहर निकला। हींग की खेती के लिए 20 से 30 डिग्री तापमान जरूरी है। संवाद
क्या है टिशू कल्चर तकनीक
जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पौधों में आनुवंशिक सुधार, उसके निष्पादन से सुधार आदि मे टिशू कल्चर एक अहम भूमिका निभाता है। इस तकनीक से पर्यावरण की कई ज्वलंत समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। पौधों में टिशू कल्चर एक ऐसी तकनीक है, जिसमें जड़, तना, पुष्प आदि से पोषक माध्यम पर उगाया जाता है। डा. संजय कुमार ने बताया कि संस्थान के कृषि वैज्ञानिक डा. किरण, डा. रोहित जोशी समेत कई शोधकर्ता विद्यार्थियों की लंबी मेहनत के बाद प्रयोगशाला में हींग की टिशू कल्चर तैयार करने में सफलता मिली है।