एचआरटीसी: माइनस डिग्री तापमान में टूटे शीशों वाली खटारा बस भेज दी शिमला से पालमपुर

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला/पालमपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 14 Jan 2022 05:54 PM IST

सार

सीट नंबर 22, 23 और 24 की खिड़की में शीशा था ही नहीं, हवा रोकने के लिए गत्ता फंसाया गया था। एक नंबर सीट पर बैठे कंडक्टर से जब ठंड सहन नहीं हुई तो उसने भराड़ीघाट में ढाबे वाले से गत्ता मांग कर सीट के सामने फंसाया। बस में इतनी ठंड थी कि ड्राइवर को सफर के दौरान गमछे से अपना पूरा मुंह बांध कर रखना पड़ा।
एचआरटीसी की खटारा बस।
एचआरटीसी की खटारा बस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सर्दी के मौसम में माइनस डिग्री तापमान के बीच शुक्रवार रात खिड़की के टूटे शीशे में गत्ता फंसा कर एचआरटीसी ने शिमला से बस पालमपुर पहुंचाई। करीब 225 किलोमीटर के सफर के दौरान यात्रियों को करीब 9 घंटे ठिठुरना पड़ा। पालमपुर डिपो की बस एचपी-68-3276 शुक्रवार रात 9: 00 बजे टूटीकंडी आईएसबीटी से पालमपुर रवाना हुई। खिड़कियों के अधिकतर शीशे ढीले होने के कारण यात्रियों को सर्द हवा से बचने के लिए शीशों के बीच गत्ते और अखबार फंसाने पड़े। 
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सीट नंबर 22, 23 और 24 की खिड़की में शीशा था ही नहीं, हवा रोकने के लिए गत्ता फंसाया गया था। एक नंबर सीट पर बैठे कंडक्टर से जब ठंड सहन नहीं हुई तो उसने भराड़ीघाट में ढाबे वाले से गत्ता मांग कर सीट के सामने फंसाया। बस में इतनी ठंड थी कि ड्राइवर को सफर के दौरान गमछे से अपना पूरा मुंह बांध कर रखना पड़ा। तड़के 4: 30 बजे बैजनाथ से पीछे ऐहजू रेलवे क्रॉसिंग के पास एकाएक बस बंद हो गई। ड्राइवर कंडक्टर ने रेडिएटर में ठंडा पानी डालने की कोशिश की लेकिन पानी उबाल मारता रहा। बोनट खोलने पर पता चला कि रेडिएटर की पाइप लीक कर रही है। सेलो टेप का जुगाड़ बना कर बड़ी मुश्किल से बस को पालमपुर पहुंचाया गया।


शीशा टूटने से पेश आई दिक्कत : आरएम
पालमपुर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक उत्तम सिंह ने बताया कि रूट के दौरान शीशा टूटने के कारण समस्या पेश आई है। नाइट सर्विस पर उन बसों को भेजने के निर्देश दिए हैं जिनकी स्थिति सही है। मुख्यालय को 20 नई बसों की डिमांड भेजी है। अप्रैल में बसें मिलने की उम्मीद हैं।

हैरत, 5 सालों से नहीं मिली एक भी नई बस
2017 के बाद पालमपुर डिपो को नई बसें नहीं मिली हं। इसलिए खटारा बसों से काम चलाया जा रहा है। कमाई की बात करें तो पालमपुर-दिल्ली चलने वाली बस की औसतन एक दिन की कमाई 17000 है। पालमपुर-शिमला की एक दिन की सर्वाधिक कमाई 36000 तक हुई है। नई बसें न होने के कारण प्रबंधन यात्रियों की जान को खतरे में डालकर खटारा बसों को रूटों पर हांकने के लिए मजबूर है।

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