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कवायद: हिमाचल में जूस उत्पादन बढ़ाने के साथ नए ग्राहकों की तलाश
Mon, 07 Mar 2022 11:57 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 07 Mar 2022 11:57 AM IST
सार
एचपीएमसी अभी 800 से 12 सौ मीट्रिक टन कंसंट्रेट जूस का उत्पादन करता है। पराला के नए संयंत्र सहित परवाणू, सुंदरनगर और जड़ोल संयंत्रों की क्षमता बढ़ने के साथ वर्ष 2022-23 में 4000 मीट्रिक टन जूस हर साल तैयार होगा।
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एचपीएमसी सेब जूस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में जूस उत्पादन बढ़ाने के साथ नए ग्राहकों की तलाश की जा रही है। हर साल जूस बेचकर कारोबार बढ़ाने से कारपोरेशन की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। सेब बागवानों को भी सेब बेचने में परेशानी नहीं होगी। एचपीएमसी अब कश्मीर, उत्तराखंड और पारले को कंसंट्रेट जूस बचेगा। स्विट्जरलैंड की कंपनी को भी सौ मीट्रिक टन जूस बेचा जा रहा है।
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एचपीएमसी अभी 800 से 12 सौ मीट्रिक टन कंसंट्रेट जूस का उत्पादन करता है। पराला के नए संयंत्र सहित परवाणू, सुंदरनगर और जड़ोल संयंत्रों की क्षमता बढ़ने के साथ वर्ष 2022-23 में 4000 मीट्रिक टन जूस हर साल तैयार होगा। अभी तक देश में जूस बनाने वाली कंपनियां सीमित मात्रा में निगम से जूस खरीदती रही हैं। एचपीएमसी पहले सिर्फ 18 हजार मीट्रिक टन सेब का जूस तैयार करता था। अब निगम 40 हजार मीट्रिक टन सेब क्रश कर कंसंट्रेट जूस तैयार करेगा।
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कश्मीर 500, उत्तराखंड का काशीपुर 250 और पारले दो से तीन हजार मीट्रिक टन कंसंट्रेट जूस खरीदने के लिए राजी हो गया है। एचपीएमसी ने पराला जूस संयंत्र का जायजा पारले कंपनी के अधिकारियों को करवा दिया है।
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एचपीएमसी के एमडी राजेश्वर गोयल कहते हैं कि एचपीएमसी के संयंत्रों से 4 हजार मीट्रिक टन जूस तैयार हो सकेगा। इस जूस को बेचने के लिए नए ग्राहकों की तलाश की गई है। पराला संयंत्र से जूस की उत्पादन लागत भी घटेगी।