Himachal: बैकडोर एंट्री से सार्वजनिक रोजगार प्राप्त करना असांविधानिक, हाईकोर्ट ने दी अहम व्यवस्था
प्रदेश हाईकोर्ट ने सार्वजनिक रोजगार से जुड़े मामले में अहम व्यवस्था दी है। अदालत ने कहा कि पिछले दरवाजे (बैकडोर एंट्री) से सार्वजनिक रोजगार प्राप्त करना संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
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अदालत को बताया गया था कि इन्होंने यात्री सेवा वितरण कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण लिया था। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें परिचालक के पद पर तैनात किया गया। तीन साल के बाद इनकी सेवाओं को बिना नोटिस के समाप्त कर दिया गया। कुछ प्रशिक्षुओं ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल से अंतरिम आदेश प्राप्त किए और अभी तक परिचालक के पद पर तैनात हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई थी कि नियमितिकरण के लिए सरकार को पॉलिसी बनाने के आदेश दिए जाएं। एचआरटीसी की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता परिचालकों के पद पर नियमितिकरण का हक नहीं रखते हैं।
इन्हें यात्री सेवा वितरण कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिया गया था। अदालत के अंतरिम आदेशों के तहत वे अभी तक परिचालक के तौर पर सेवाएं दे रहें हैं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने निर्णय में कहा कि एचआरटीसी एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है और सभी संवर्गों का रोजगार आवश्यक रूप से सार्वजनिक रोजगार में आता है। सार्वजनिक क्षेत्र में सभी पात्र व्यक्तियों को समान अवसर दिए बिना नियुक्ति देना संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
मामले से जुड़े रिकॉर्ड के बाद अदालत ने पाया कि एचआरटीसी ने याचिकाकर्ताओं को किसी भी रोजगार या पद की पेशकश नहीं की थी। याचिकाकर्ताओं के पास न तो कोई नियुक्ति पत्र है और न ही कोई नियुक्ति की शर्तें। याचिकाकर्ताओं को केवल स्टॉप-गैप व्यवस्था के रूप में नियुक्त किया गया था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को इसका कोई अधिकार नहीं है कि उनकी सेवाओं को जारी रखा जाए। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने पिछले दरवाजे से प्रवेश सुनिश्चित किया है, इस आधार पर संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत वे समानता का अधिकार पाने के हकदार नहीं हैं।
चरस रखने के आरोपों में सजायाफ्ता हाईकोर्ट से बरी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के आरोप में सजा भुगत रहे हुकम सिंह को बरी कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा और न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की खंडपीठ ने अपीलकर्ता को तुरंत प्रभाव से रिहा करने के आदेश दिए हैं। सत्र न्यायाधीश ऊना ने हुकम सिंह को 1.9 किलोग्राम चरस रखने का दोषी ठहराते हुए 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को सतपाल ने अपील के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। 11 अक्तूबर 2019 को कोहार्चम से स्पाैरी सड़क पर पुलिस गश्त लगा रही थी। कोहार्चम पुल पर जब पुलिस पहुंची तो उन्होंने आरोपी को आते हुए देखा। तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपी से 1.9 किलोग्राम चरस बरामद की थी।
पुलिस ने हुकम सिंह के खिलाफ पुलिस थाना अंब में मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। प्रारंभिक जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने हुकम सिंह के खिलाफ सत्र न्यायाधीश ऊना की अदालत में अभियोग चलाया। गवाहों के बयानों के आधार पर निचली अदालत ने हुकम सिंह को चरस रखने का दोषी ठहराया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन कर पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी विरोधाभासी है। कहानी में यदि शक की गुंजाइश रहती है तो इसका लाभ अभियुक्त को दिया जाना चाहिए।