{"_id":"64fdbfbe6f5e5f8ff30c41d3","slug":"himachal-solan-news-shiitake-mushroom-cultivation-crop-will-be-ready-in-45-days-2023-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shiitake Mushroom: छह माह के बजाय अब 45 दिन में तैयार होगी कैंसर से लड़ने वाली शिटाके मशरूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shiitake Mushroom: छह माह के बजाय अब 45 दिन में तैयार होगी कैंसर से लड़ने वाली शिटाके मशरूम
Mon, 11 Sep 2023 11:38 AM IST
अरविन्द ठाकुर
ललित कश्यप, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
ललित कश्यप, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 11 Sep 2023 11:38 AM IST
सार
यह मशरूम कैंसर की दवा का मुख्य स्रोत है। एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
विज्ञापन
शिटाके मशरूम।
- फोटो : संवाद
विस्तार
कैंसर से लड़ने वाली शिटाके मशरूम अब तीन से छह माह में नहीं, बल्कि मात्र 45 दिन में तैयार होगी। खुंब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) सोलन ने मशरूम को लकड़ी के बुरादे पर जल्द तैयार करने में सफलता हासिल की है। वर्तमान में दुनिया भर में भारत इस औषधीय मशरूम को तैयार करने में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। इसका अधिकतर इस्तेमाल कॉफी और दवाओं में होता है। स्वाद में बेहद कड़वी होने से दवा में इसका इस्तेमाल कैप्सूल में किया जाता है।
विज्ञापन
सूखी शिटाके मशरूम 5,000 रुपये प्रति किलो मिलती है। उगाने के बाद सीधे दवा कंपनियों को इसे सप्लाई किया जाता है। यह मशरूम कैंसर की दवा का मुख्य स्रोत है। एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। डीएमआर की ओर से शिटाके मशरूम का अर्ली स्पॉन तैयार करने के बाद इसे उगाने पर शोध चल रहा था, जिसमें सफलता मिल गई है।
विज्ञापन
सबसे पहले इसे लकड़ी पर तैयार किया जाता था, जिससे यह छह माह बाद तैयार होती थी। इसके बाद विशेषज्ञों ने इस पर शोध कार्य कर इसे लकड़ी के बुरादे पर तैयार किया। इसमें यह तीन माह में तैयार हुई। अब यह लकड़ी के बुरादे पर ही 16 से 18 डिग्री तापमान पर 45 दिनों में तैयार हो रही है।
विज्ञापन
इसे सोलन में चल रहे राष्ट्रीय खुंब मेले में रविवार को प्रदर्शित किया गया। उधर, डीएमआर सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिकों की मेहनत फल लाई है। बीज तैयार करने के बाद अच्छा उत्पादन होना शुरू हो गया है। इसका बीज अब देशभर के 32 केंद्रों में उपलब्ध है। यह मशरूम दुनिया भर में उगाई जाती है, जिसमें भारत पांचवें स्थान पर है।
प्लास्टिक बैग के साथ क्रेट में भी उगा सकेंगे मशरूम
प्लास्टिक के कम इस्तेमाल और मशरूम उगाने के खर्च को कम करने के लिए डीएमआर में शोध कर रहा है। इसके तहत प्लास्टिक बैग के स्थान पर क्रेट का इस्तेमाल कर बटन और पैडी स्ट्रॉ मशरूम तैयार की है। इसका प्रशिक्षण सफल रहा है। राष्ट्र स्तरीय खुंब मेले के दौरान इसे प्रदर्शित भी किया गया है। इस तकनीक को प्रदर्शनी में भी लगाया गया था। इस दौरान देश भर से आए मशरूम उत्पादकों को भी इसकी जानकारी दी गई।
जी-20 सम्मेलन में भी लगाई प्रदर्शनी, जायजा भी लिया
नई दिल्ली में दो दिन चले जी-20 शिखर सम्मेलन में मशरूम सिटी ऑफ इंडिया सोलन में स्थित खुंब निदेशालय ने भी हिस्सा लिया। इसमें मशरूम की सात किस्मों को प्रदर्शित किया गया और इसका विदेशी मेहमानों ने जायजा लेकर इसकी जानकारी भी हासिल की। दिल्ली में गेनोडरमा, शिटाके, कोर्डिसेप्स, साइजोफेल्म हीरेशियम मशरूम की किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई थी।