हिमाचल: न चक्का जाम; न गाड़ियां खड़ी करेंगे, एचआरटीसी बस चालक 1 अगस्त से आठ घंटे ही करेंगे काम
यूनियन के प्रधान मानसिंह ठाकुर ने कहा कि एचआरटीसी प्रबंधन डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री से एक सप्ताह में वार्ता करवाए, ताकि मांगें पूरी हो सकें।
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पुराना बस स्टैंड स्थित एचआरटीसी के मुख्यालय के बाहर ड्राइवर यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने गेट मीटिंग कर प्रदर्शन किया। यूनियन के प्रधान मानसिंह ठाकुर ने कहा कि एचआरटीसी प्रबंधन डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री से एक सप्ताह में वार्ता करवाए, ताकि मांगें पूरी हो सकें। कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह 1 अगस्त से न तो चक्का जाम करेंगे और न ही बसों को खड़ी करेंगे, बल्कि आठ घंटे की रोजाना ड्यूटी देना शुरू कर देंगे। इससे जो परेशानी लोगों को होगी, उसकी जिम्मेवारी सरकार और निगम प्रबंधन की होगी।
मानसिंह ठाकुर, और यूनियन के वरिष्ठ उप प्रधान रंजीत ठाकुर, लोकल डिपो के प्रधान लतेश कुमार लेज राम, धर्मवीर, पदम सिंह ने बताया कि नाइट ड्यूटी के दौरान एचआरटीसी की ओर से 130 रुपये बतौर भत्ता दिया जाता है, लेकिन गंतव्य पर ठहरने, खाने और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए प्रतिदिन 200 से भी अधिक खर्चा आ रहा है। नाइट ड्यूटी में हम खुद खर्च कर रहे हैं। भत्ते के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है। चार साल से लंबित एरियर की किस्तें नहीं मिल रही हैं। मेडिकल रिइंबर्समेंट नहीं मिल रहा है। मानसिंह ठाकुर ने बताया कि निगम के प्रबंध निदेशक ने कर्मचारियों की कई बातों को माना है और समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन वित्तीय मामलों पर बात करने के लिए डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री से मुलाकात की बात कही है।
एचआरटीसी की बीओडी में लाया जा सकता है प्रस्ताव
हिमाचल पथ परिवहन निगम चालक में यूनियन की मांगों का प्रस्ताव बीओडी की बैठक लाया जा सकता है। एचआरटीसी की बीओडी 29 जुलाई को होगी। हालांकि निगम प्रबंधन ने चालक संगठन के पदाधिकारियों को बैठक में मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया है। अब कर्मचारियों की निगाहें वीओडी पर टिकी हुई हैं। एचआरटीसी कर्मचारी नाइट ओवर टाइम और अन्य भत्ते जारी करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों को बीते पांच साल का करीब 100 करोड़ रुपये का ओवरटाइम भुगतान लंबित है। कर्मचारियों को मिलने वाला करोड़ों रुपये का चिकित्सा भत्ता भी काफी समय से अटका हुआ है। निगम प्रबंधन ने यूनियन को एक तारीख तक तनख्वाह और पेंशन देने का आश्वासन दिया दिया है, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनरों को पगार देने की कोई समय सीमा नहीं है। ऐसे में एचआरटीसी के कर्मचारी सरकार और निगम प्रबंधन से उखड़े हैं। अपनी मांगों को लेकर कार्यालय के बाहर गेट मीटिंग की जा रही है। अब इन्होंने आठ घंटे सेवाएं देने का फैसला लिया है।