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हिमाचल प्रदेश की पिछली सरकारों में बड़ा मुद्दा रह चुका फोन टैपिंग

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 21 Jul 2021 01:39 PM IST

सार

वर्ष 2012 में 25 दिसंबर को वीरभद्र सरकार ने तो सीआईडी मुख्यालय पर इससे पिछली रात छापेमारी करने के बाद शपथ ली थी। फोन टैपिंग के आरोप लगाते हुए मुख्यालय को ही सील कर दिया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश की पिछली सरकारों में फोन पर जासूसी एक बड़ा मुद्दा रह चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रेमकुमार धूमल तो इस संबंध में एक-दूसरे की सरकारों पर अपने और अन्य राजनेताओं के फोन टैप करने के आरोप तक लगा चुके हैं। अब देश भर में बहुचर्चित पैगासस प्रकरण के बाद राज्य के कई राजनेताओं के भी कान खडे़ हो गए हैं। हालांकि, यह दूसरी बात है कि जयराम सरकार के तीन साल का कार्यकाल बीत जाने के बाद किसी भी विपक्षी नेता ने उन पर इस तरह का कोई आरोप नहीं लगाया है। बेशक हर तीसरे महीने टेलीग्राफ एक्ट के तहत अपराधियों के टैप किए फोन के बारे में मुख्य सचिव समीक्षा निरंतर करते हैं। 
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इस्राइली जासूसी सॉफ्टवेयर पैगासस फोन में एक सामान्य व्हाट्सऐप कॉल से भी पहुंच सकता है। जिसको कॉल गई है, वह जवाब दे या न दे, उसके फोन में यह पहुंच जाता है। यह फोन में विभिन्न लॉग एंट्री डिलिट कर देता है, जिससे इसकी मौजूदगी का पता नहीं चलता। यह यूजर के मैसेज पढ़ता है। फोन कॉल ट्रैक करता है। सूचनाएं चुराता है। यह ब्राउजिंग हिस्टरी, कांटैक्ट, ई-मेल के अलावा फोन से स्क्रीन शॉट भी लेता है। वर्तमान में देश में यह बड़ा मुद्दा बन गया है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के कुछ राजनेता भी चौकन्ने जरूर हो गए हैं, मगर किसी की इस संबंध में आशंका सामने नहीं आई है। इस मामले में निर्विवादित रही जयराम सरकार के खिलाफ किसी भी राजनेता ने विभिन्न माध्यमों से फोन पर जासूसी करने का कोई आरोप नहीं लगाया है, जैसे वीरभद्र और धूमल सरकारों में लगाए जाते रहे हैं।  


सीआईडी मुख्यालय पर छापेमारी के बाद ली थी वीरभद्र सरकार ने शपथ 
वर्ष 2012 में 25 दिसंबर को वीरभद्र सरकार ने तो सीआईडी मुख्यालय पर इससे पिछली रात छापेमारी करने के बाद शपथ ली थी। फोन टैपिंग के आरोप लगाते हुए मुख्यालय को ही सील कर दिया गया था। बाद में इस संबंध में एक मामला भी दर्ज किया गया। तत्कालीन डीजीपी आईडी भंडारी को फोन टैपिंग मामले में लपेटा गया। तत्कालीन सरकार सैकड़ों फोन टैप करने के आरोप लगाती रही, मगर बाद में ये कोर्ट में साबित नहीं हो पाए। बाद में आईडी भंडारी ने झूठा मामला बनाने के आरोप में कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई, जिस पर अभी तक जांच चल रही है। 

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