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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का भूमि अधिग्रहण प्लान विवादों के घेरे में

Sun, 30 Aug 2020 01:02 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 30 Aug 2020 01:02 PM IST
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Himachal News: kiratpur ner chowk four lane land acquisition plan in controversy
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण कार्य के लिए हुए भूमि अधिग्रहण की रोड अलाइनमेंट पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण परियोजना निदेशक मंडी के अलग-अलग बयानों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के लिए वनमंडलाधिकारी बिलासपुर ने रोड अलाइनमेंट प्लान तो भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई बिलासपुर के भू अर्जन अधिकारी ने भूमि अधिग्रहण प्लान और ततीमा को आधार माना है। परियोजना निदेशक एनएचएआई ने डिजाइन और भूमि अधिग्रहण प्लान को आधार बनाकर भूमि अधिग्रहण की पुष्टि की है।  

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निर्माण में बरती गई अनियमितताओं पर उपायुक्त बिलासपुर ने 16 जुलाई को फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति तथा प्रशासनिक अधिकारियों व परियोजना निदेशक एनएचएआई से विशेष  बैठक कर जिलास्तर पर कमेटी का गठन कर जांच करने के आदेश जारी किए थे। बैठक में परियोजना निदेशक ने समिति के सवालों का जवाब देते हुए उपायुक्त बिलासपुर को अवगत करवाया था कि उपरोक्त परियोजना में डिजाइन के आधार पर भूमि का अधिग्रहण हुआ है।
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जबकि उपरोक्त परियोजना निदेशक ने अपने कार्यालय के पत्र संख्या  एनएचएआई/पीडी/पीआईयू मंडी/ आरटीआई/18/272 में नियमानुसार जानकारी उपलब्ध करवाई है कि उपरोक्त परियोजना में एलएपी के अनुसार अधिग्रहण की गई जमीन पर सीगल इंडिया लिमिटेड कंपनी कार्य कर रही है। अब परियोजना निदेशक की ये दोनों रिपोर्टें विरोधाभाषी हैं।
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अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट भी एक-दूसरे से मेल नहीं खा रही हैं। वहीं, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि उपरोक्त परियोजना की नियमानुसार जांच से पहले भूमि अधिग्रहण शुरू करने से लेकर भू मालिकों से नियमानुसार कब्जा लेने तक क्रमांक बार जानकारी व दस्तावेजों को उपलब्ध करवाया जाए। 


उधर, कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मंडी के परियोजना निदेशक अमन रोहिला ने बताया कि उन्होंने सरकार से तीन माह का समय मांगा है। तीन माह के अंदर सरकार को उक्त फोरलेन से संबधित सभी मुद्दों पर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। अगर कोई खामी रह गई होगी तो उसे सुधारा जाएगा।

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