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स्वतंत्रता सेनानी: शांभवी ने अंडमान में खोजा परदादा भाई हिरदा राम की काले पानी की सजा का इतिहास
Mon, 08 Nov 2021 11:45 AM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 08 Nov 2021 11:45 AM IST
सार
शांभवी इन दिनों अंडमान के आईसीएमआर संस्थान में वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत हैं। वह अंडमान में तैनात हुईं तो उन्होंने पड़दादा के इतिहास को जानने का प्रयास शुरू किया।
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अंडमान जेल में शांभवी। जहां भाई हिरदा राम का इतिहास दर्ज है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मंडी के स्वतंत्रता सेनानी भाई हिरदा राम की पड़पौत्री शांभवी ने अंडमान में अपने परदादा के कालापानी के कारावास के बारे में कई रहस्यों का पता लगाया है। कड़ी मशक्कत और सेलुलर जेल के अधिकारियों के साथ बार-बार संपर्क करने के बाद वह अब जाकर सफल हुईं। शांभवी ने हाल ही में अंडमान में वह पन्ना खोज डाला, जिसमें भाई हिरदा राम को लेकर जिक्र किया गया है। इसके अनुसार भाई हिरदा राम के खिलाफ अंग्रेजों ने भादंसं की धारा 121, 121 ए,122, 131, 397, 398, 395, 302 और 109 में मामला दर्ज करके मृत्युदंड दिया था।
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जिसे बाद में उम्र कैद में बदला गया और उन्हें 29 अक्तूबर 1915 को अंडमान जेल में कैद किया गया। 1921 में उन्हें वापस भारत की जेलों में भेजने का निर्णय हुआ। 1930 में उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। पुस्तक में उनका नाम हिदा राम छपा है। पुस्तक में प्रकाशित है कि वह गदर पार्टी के प्रमुख नेता डॉ. मथुरा दास के मित्र हैं। यह सब अब ऑन रिकॉर्ड उपलब्ध हो गया।
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शांभवी इन दिनों अंडमान के आईसीएमआर संस्थान में वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत हैं। वह अंडमान में तैनात हुईं तो उन्होंने पड़दादा के इतिहास को जानने का प्रयास शुरू किया। भाई हिरदा राम के पौत्र और रिकॉर्ड तलाशने वाली शांभवी के पिता रिटायर्ड इंजीनियर शमशेर मिन्हास का कहना है कि उनका परिवार चाहता है कि प्रदेश सरकार अपना 2022 का कैलेंडर भाई हिरदा राम क्रांतिकारी के नाम से सचित्र प्रकाशित करे। इंदिरा मार्केट पर स्थापित उनकी प्रतिमा के चारों ओर रेलिंग लगाई जाए।
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