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हौसले की उड़ान: धर्मशाला की दिव्या ने फतह किया 72 किमी का खारदुंगला चैलेंज
Fri, 16 Sep 2022 11:20 AM IST
अरविन्द ठाकुर
मोहिंद्र सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
मोहिंद्र सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 16 Sep 2022 11:20 AM IST
सार
दिव्या ने 31 घंटे और 08 मिनट में 9 डिग्री तक तापमान में दो पुरुष धावकों के बाद द्वितीय रनरअप के रूप में विजय प्राप्त की।
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दिव्या वशिष्ठ।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
दुनिया के सबसे ऊंचे अल्ट्रा मैराथन खारदुंगला चैलेंज में धर्मशाला की दिव्या वशिष्ठ ने वेटरन कैटेगिरी में दूसरा स्थान पाया है। नौ सितंबर को लेह में हुई प्रतियोगिता में दिव्या ने 72 किलोमीटर की कठिन खारदुंगला चैलेंज मैराथन में 50 प्लस आयु के वयोवृद्ध वर्ग में रेस को 12:48 घंटे पूरा किया। सुबह 3:00 बजे माइनस डिग्री तापमान में शुरू हुई मैराथन में दिव्या ने अपने हौसले के दम पर इस रेस को पूरा किया है।
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प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रही दिव्या को ट्रॉफी और 20,000 रुपये इनामी राशि से सम्मानित किया गया। धर्मशाला के लांझणी की दिव्या वशिष्ठ (53) ने इससे पूर्व 161 किलोमीटर (100 मील) वाली अति दुर्गम गढ़वाल ऍनडुरंस रेस में भाग लेकर एक मात्र महिला विजेता बनी थीं। मैराथन में पांच प्रतिभागियों के बीच केवल अकेली महिला प्रतिभागी थीं। दिव्या ने 31 घंटे और 08 मिनट में 9 डिग्री तक तापमान में दो पुरुष धावकों के बाद द्वितीय रनरअप के रूप में विजय प्राप्त की।
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दिव्या की पढ़ाई सेंट ल्यूक स्कूल सोलन में हुई है। देश और विदेश में कई उच्च पदों पर कार्य कर चुकी हैं। वर्ष 2016 तक दिव्या ने 14 घंटे में 100 किमी की अधिकतम दूरी और बंगलूरू अल्ट्रा और खारदुंग ला चैलेंज में 72 किमी और दुनिया की सबसे ऊंची अल्ट्रा मैराथन में लगभग 17,582 फीट की ऊंचाई पर दौड़ लगाई थी। 2017 में दक्षिण अफ्रीका में 11 घंटे और 42 मिनट में कॉमरेड्स अप रन में भाग लिया था।
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कुछ अलग करने का रहता है जुनून
दिव्या ने बताया कि बचपन से उन्हें कुछ अलग करने की चाह थी। देश-विदेश में कई जगह रहने के बाद भी जब धर्मशाला आईं तो दौड़ने के जुनून को जिंदगी में शामिल किया। उन्होंने कई ट्रैक पर दौड़ने का अलग अनुभव पाया है। दुनिया के सबसे ऊंचे खारदुंगला चैलेंज को दूसरी बार फतह करने का कुछ अलग ही अनुभव रहा।