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हिमाचल: समय पर न बिकने से हर साल 30 फीसदी सेब बरबाद
Sat, 28 Aug 2021 02:38 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 28 Aug 2021 02:38 PM IST
सार
प्रदेश में सेब की फसल को बेचने के अलावा कोई और चारा बागवानों के पास नहीं रहता है। फसल पेड़ से तोड़ने के बाद मंडियों में बेचनी पड़ती है।
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सेब (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में भले ही सेब का कारोबार भले ही पांच करोड़ का रहा है लेकिन दूसरा पहलु यह भी है कि हर साल बागवानों की तैयार फसल में से 30 फीसदी सेब बेचने से पहले बरबाद होता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही बताया जा रहा है कि अधिकांश बागवान किसी न किसी कारण से सेब की फसल समय पर मंडियों में नहीं बेच पाते और पूरी फसल को दाम नहीं मिल पाता। सेब अधिक पक्का हो तो भी बाजार में फसल को बेचना कठिन होता है। अच्छे सेब की बिक्री बागवानों को खुद ही करनी पड़ती है।
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प्रदेश में सेब की फसल को बेचने के अलावा कोई और चारा बागवानों के पास नहीं रहता है। फसल पेड़ से तोड़ने के बाद मंडियों में बेचनी पड़ती है। सेब खराब न हो जाए। इसके लिए बागवानों को फ सल औने पौने दामों में बेचनी पड़ती है। यह सिलसिला पिछले कई साल से सेब सीजन में रहता है। यही कुछ इस साल भी सेब सीजन में देखने को मिल रहा है। बागवान सेब के रेट को लेकर खासे चितिंत हैं, क्योंकि उनको फसल की उत्पादन लागत तक पूरी नहीं मिल रही।
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सीजन में मामला गरमाया, मंत्री अफसर फील्ड में पहुंचे
सेब सीजन में मामला गरमाते देख मंत्री और अफसर फील्ड में उतरने को विवश हुए हैं। शुक्रवार को शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज पराला मंडी का दौरा करने पहुंचे। जहां पर मार्केटिंग बोर्ड और स्थानीय अधिकारियों की बैठक ली। मंडी की व्यवस्था को लेकर जायजा भी लिया।
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छोटी प्रोसेसिंग यूनिटें लगती तो यह नौबत न आती
हिमाचल में वर्षों बाद भी ऊ परी क्षेत्रों में सेब पर आधारित छोटे उद्योग नहीं लगे। अगर फलों पर आधारित उद्योग समय पर स्थापित किए होते तो बागवानों के पास फल बेचने का विकल्प रहता। बागवानों की तीस फीसदी खराब होने वाली फसलों को बेचकर मुनाफा होता। आज सिर्फ मंडियों में सेब बेचना मजबूरी रहती है।
चुनिंदा प्रोसेसिंग यूनिटों में ही बनता है जूस
सरकारी उपक्रम एचपीएमसी के संयंत्र सिर्फ प्रदेश के सी ग्रेड के सेब से जूस निकालने तक सीमित हैं। इसके अलावा बंपर सीजन में सी ग्रेड का सेब पेटियों में भरकर बाजार में आ जाए तो अच्छे सेब को दाम नहीं मिल पाते।
हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि सरकार ने समय पर सेब उत्पादक क्षेत्रों में छोटी फल विधायन यूनिटें स्थापित की होती तो बागवानों को पूरी तरह से मंडियों में लदानियों और आढ़तियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।