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हिमाचल: सेब आयात शुल्क में कटौती पर भड़का किसान मंच, आंदोलन की दी चेतावनी

Tue, 10 Feb 2026 07:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 10 Feb 2026 07:20 PM IST
सार

 संयुक्त किसान मंच का दावा है कि अमेरिका के वाशिंगटन सेब का 18 किलो का बॉक्स आज भी 28 डालर यानी करीब 2576 रुपये के हिसाब से 143 रुपये प्रति किलो भारत पहुंच रहा है।

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Himachal kisan manch enraged over reduction in apple import duty, warned of agitation
हरीश चौहान, संयोजक संयुक्त किसान मंच। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत सेब के आयात शुल्क में की गई कटौती ने हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। समझौते के अनुसार सेब पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किया गया है, जबकि सरकार का दावा है कि न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) के जरिये घरेलू किसानों को संरक्षण मिलेगा। हालांकि बागवान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावहारिक स्तर पर एमआईपी कभी प्रभावी ढंग से लागू नहीं होता। संयुक्त किसान मंच का दावा है कि अमेरिका के वाशिंगटन सेब का 18 किलो का बॉक्स आज भी 28 डालर यानी करीब 2576 रुपये के हिसाब से 143 रुपये प्रति किलो भारत पहुंच रहा है।

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केंद्र सरकार दावा कर रही है कि भारत अमेरिका आयात निर्यात समझौते के बाद यह सेब न्यूनतम 100 रुपये किलो के दाम पर भारत पहुंचेगा। आज तक वाशिंगटन सेब प्रति किलो एक डालर (92 रुपये) से कम में कभी भारत नहीं पहुंचा। इस पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत यानी 46 रुपये जोड़ा जाए तो रेट 138 रुपये किलो बनता है। मौजूदा समय में वाशिंगटन सेब परचून में 200 से 300 रुपये किलो बिक रहा है। केंद्र सरकार के दावे के अनुसार अगर यह सेब 100 रुपये किलो के दाम पर पहुंच कर 150 रुपये में बिकेगा तो स्वदेशी सेब को इसका भारी नुकसान होगा। सेब बागवान पहले से ही जलवायु परिवर्तन, सेब उत्पादन की बढ़ती लागत और महंगे परिवहन की मार झेल रहे हैं ऐसे में आयात शुल्क में कटौती का फैसला बागवानों के लिए विनाशकारी साबित होगा।

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विदेशी सेब पर ड्यूटी घटने के होंगे गंभीर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव : देविंदर शर्मा
शिमला। देश के जाने माने कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा का कहना है कि विदेशी सेब पर ड्यूटी घटने के सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों पर गंभीर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ेंगे। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा ने कहा कि विदेशी सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से कम कर 20 से 25 फीसदी करने से आने वाले समय में व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

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सेब किसानों की आवाज बनेगी भारतीय किसान यूनियन : टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब किसानों के लिए खतरे की घंटी है। भारतीय किसान यूनियन सेब किसानों की आवाज बनेगा। केंद्र सरकार के किसान विरोधी एफटीए के विरोध में देश भर में आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

समझौते के फाइनल ड्रॉफ्ट पर तय होगी आंदोलन की रूपरेखा : हरीश
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि सस्ते अमेरिकी सेब भारतीय बाजारों में भर जाएंगे, जिससे स्थानीय सेब के दाम गिरेंगे और बागवानों को भारी नुकसान होगा। मार्च में इस समझौते का फाइनल ड्राफ्ट आएगा। इसके आधार पर आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। सेब अर्थ व्यवस्था को बचाने के लिए सेब आयात शुल्क में कटौती के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

मोदी सरकार ने बागवानों के हितों का रखा ध्यान : जयराम
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि अमेरिका से हुई ट्रेड डील और यूरोपीय यूनियन से हुए मुक्त व्यापार समझौते का देश के बागवानों को कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत सरकार की ओर से सब के न्यूनतम आयात मूल्य को बढ़ाने की वजह से किसी भी देश के सेब की लैंडिंग कास्ट हिमाचल के सेब से अधिक ही रहेगी। मोदी सरकार ने न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका से आने वाले सेब के मामले में बागवानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित किया। ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ठोस, दूरदर्शी और संतुलित कदम उठाए हैं। सेब आयात को लेकर न्यूज़ीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे देशों के साथ होने वाले व्यापारिक प्रावधानों में यह सुनिश्चित किया गया है कि घरेलू सेब उत्पादकों के हितों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सेब आयात के लिए न्यूनतम आयात मूल्य, सीमित कोटा, मौसमी समय-सीमा और सेफगार्ड प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किया है, जिससे सस्ता विदेशी सेब भारतीय मंडियों में आकर हिमाचल प्रदेश के बागवानों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यूरोपीय संघ से आने वाले सेब पर 80 प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य लागू है, इसके कारण उनकी लैंडेड कीमत 96 प्रति किलो से कम नहीं होती। इसी प्रकार न्यूजीलैंड से आने वाले सेब उच्च न्यूनतम आयात मूल्य और शुल्क के कारण लगभग 140 प्रति किलो की प्रीमियम श्रेणी में ही भारत आते हैं। अमेरिका से आने वाले सेब पर 80 प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य और 25 प्रतिशत आयात शुल्क लागू होने के बाद उनकी लैंडेड कीमत लगभग 105 प्रति किलो रहती है। यह सभी व्यवस्थाएं यह स्पष्ट करती हैं कि विदेशी सेब भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर प्रवेश नहीं कर सकते। सभी देशों के लिए कोटा निर्धारित है।

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