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हिमाचल: सरकार ने बढ़ाई औद्योगिक निवेश नीति की प्रोत्साहन अवधि, किए महत्वपूर्ण बदलाव

Fri, 29 Apr 2022 09:28 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 29 Apr 2022 09:28 PM IST
सार

अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में न्यूनतम पूंजीगत निवेश से स्थापित एंकर उद्योगों को प्रथम औद्योगिक उद्यम, औद्योगिक क्षेत्र के बाहर जिलों में उद्योगों को प्रथम औद्योगिक उद्यम माना जाएगा। 

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Himachal Government extended the incentive period of Industrial Investment Policy, made important changes
उद्योग(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश औद्योगिक निवेश नीति-2019 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में न्यूनतम पूंजीगत निवेश से स्थापित एंकर उद्योगों को प्रथम औद्योगिक उद्यम, औद्योगिक क्षेत्र के बाहर जिलों में उद्योगों को प्रथम औद्योगिक उद्यम माना जाएगा। हिमाचल में 200 करोड़ रुपये के निर्धारित पूंजीगत निवेश और कम से कम 200 बोनाफाइड हिमाचलियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्योगों को श्रेणी-ए,  150 करोड़ रुपये के निर्धारित पूंजीगत निवेश और कम से कम 150 बोनाफाइड हिमाचलियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्योगों को श्रेणी-बी और 100 करोड़ रुपये के निर्धारित पूंजीगत निवेश तथा कम से कम 100 बोनाफाइड हिमाचलियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्योगों को श्रेणी-सी में वर्गीकृत किया गया है। नीति के तहत प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए समाप्त हो रही अवधि को 31 दिसंबर 2022 से 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाया गया है। 

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अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग आरडी धीमान ने कहा कि एसजीएसटी प्रतिपूर्ति का लाभ उठाने के लिए पात्र उद्यम जो राज्य कर और आबकारी विभाग की ओर से शुद्ध एसजीएसटी के लंबित मूल्यांकन के कारण दावा नहीं कर सके हैं। वे 31 दिसंबर 2022 तक आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नई अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों व सामूहिक रूप से उद्यम स्थापित करने के उद्देश्य से भूमि, प्लॉट, शेडों का पांच फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। नए विकास खंड नैना देवी, बाली चौकी, धनोटू, निहरी, चुराग, टुटू, कुपवी, कोटखाई, तिलोरधार को राज्य की श्रेणी- बी में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि निवेश को प्रोत्साहन करने के लिए उद्योगों को रियायतें और सुविधाएं देने के लिए 16 अगस्त, 2019 को हिमाचल प्रदेश औद्योगिक निवेश नीति - 2019 अधिसूचित की थी। इसमें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की लागत पर 50 फीसदी की दर से उपदान, 3 फीसदी  ब्याज सबवेंशन, प्लांट और मशीनरी के परिवहन के लिए 50 फीसदी सहायता, 3.5 फीसदी परिवहन उपदान, गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 50 फीसदी सहायता, एफ ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए 25 फीसदी सहायता, एमएसएमईए बड़े और एंकर उद्यमों के लिए कुल राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति के लिए 50.90 फीसदी प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। 

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