हिमाचल कैबिनेट निर्णय: निजी स्कूल फीस नियंत्रण विधेयक टाला, कोरोना को लेकर तीन दिन बाद बैठक
- हिमाचल कैबिनेट के फैसले
- निजी स्कूल फीस नियंत्रण विधेयक टाला
- कोरोना को लेकर तीन दिन बाद होगी बैठक
- सीएम जयराम की अध्यक्षता में हुई बैठक
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विस्तार
हिमाचल मंत्रिमंडल ने निजी स्कूल फीस नियंत्रण विधेयक को फिलहाल टाल दिया है। इस विधेयक को बजट सत्र में लाने की तैयारी थी लेकिन ऐन मौके पर विधेयक के कई बिंदुओं पर कुछ मंत्री सहमत नहीं हुए। लंबे मंथन के बाद मंत्रिमंडल ने अब शिक्षा विभाग को नए सिरे से विधेयक का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। भले ही 19 मार्च को फिर मंत्रिमंडल की बैठक प्रस्तावित है लेकिन बजट सत्र में इस विधेयक के पेश होने पर संशय खड़ा हो गया है। चूंकि बजट सत्र 20 मार्च को संपन्न होने जा रहा है।
सोमवार शाम 6:30 बजे के बाद विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में फीस नियंत्रण विधेयक पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार कुछ मंत्रियों ने इस प्रस्ताव के कई बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए कमियों को दूर करने की वकालत की। विस्तृत चर्चा के बाद मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को विदड्रा कर दिया। इससे नए शैक्षणिक सत्र से निजी स्कूलों की फीस पर अंकुश लगने की आस में बैठे लाखों अभिभावकों को बड़ा झटका लगा है। अब प्रस्ताव की कमियों को दूर करने और दोबारा से इसे विधानसभा में पेश करने के लिए मानसून सत्र का इंतजार करना पड़ेगा।
कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर तीन दिन बाद फिर बुलाई बैठक
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच तीन दिन बाद 19 मार्च को फिर कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है। सोमवार को हुई बैठक में करीब पौने घंटे तक स्वास्थ्य सचिव ने कोरोना पर प्रस्तुति दी। बताया गया कि प्रदेश में करीब 15 दिन से मामले बढ़ रहे हैं। लोग बिना मास्क घूम रहे हैं। सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ रही हैं। मेले, रैलियों में उमड़ रही भीड़, शिक्षण संस्थानों का खुलना, बसों में ओवरलोडिंग खतरनाक हो सकती है। इसमें बंदिशें लगाने की सिफारिश की गई है। अब 19 मार्च को होने वाली बैठक के लिए प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को भी कोविड-19 के नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया है। मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश भू राजस्व संशोधन बिल-2021 को विस्तृत छानबीन के लिए भेजने का फैसला लिया है। प्रदेश में वर्ष 1954 से यह कानून लागू है। इसके बाद से आज तक कई तरह के बदलाव आए हैं। इसे देखते हुए यह संशोधन विधेयक लाया जाना है। मंजूरी देने से पहले संशोधनों की विस्तृत छानबीन करने की सिफारिश की गई है।
ऊना के मैड़ी में होला मोहल्ला मेले पर रोक
प्रदेश मंत्रिमंडल ने ऊना के बाबा बड़भाग सिंह गुरुद्वारा परिसर मैड़ी में 21 से 31 मार्च तक होने वाले होला मोहल्ला मेले पर रोक लगा दी है। ऊना जिले में कोरोना के बढ़ते मामलों और पंजाब में बिगड़ते हालात को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। इस मेले में पंजाब से भी हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पंजाब में कोरोना के मामले बेकाबू होने के बाद सरकार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है। दूसरी ओर, मंत्रिमंडल ने पपरोला के होली मेले को जिला का दर्जा देने का फैसला लिया है।
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच तीन दिन बाद 19 मार्च को फिर कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है। सोमवार को हुई बैठक में करीब पौने घंटे तक स्वास्थ्य सचिव ने कोरोना पर प्रस्तुति दी। इसमें बंदिशें लगाने की सिफारिश की गई है। अब 19 मार्च को होने वाली बैठक के लिए प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को भी कोविड-19 के नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया है।