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Shimla News: हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर अवैध खनन करने पर हाईकोर्ट सख्त, लाइसेंस धारकों की सूची तलब

Thu, 01 Jun 2023 09:09 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 01 Jun 2023 09:09 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर अवैध खनन करने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार से खनन लाइसेंस धारकों की सूची तलब की है। 

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High court strict on illegal mining on Himachal-Uttarakhand border
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर अवैध खनन करने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार से खनन लाइसेंस धारकों की सूची तलब की है। यमुना नदी की आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन रोकने के लिए अदालत ने केंद्र को आठ हफ्ते में अंतरराज्यीय सीमा की निशानदेही करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 8 अगस्त को निर्धारित की है। उत्तराखंड के देहरादून निवासी गजेंद्र रावत ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यमुना नदी की वेटलैंड के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन किया जा रहा है।

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राज्य सरकार ने इसके लिए 77 लाइसेंस जारी किए हुए हैं। वीरवार को मामले पर हुई सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यमुना नदी की वेटलैंड के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगाई है। अदालत ने अपने आदेशों में कहा कि खनन रोकने के लिए आर्द्रभूमि (वेटलैंड) की निशानदेही करवानी आवश्यक है। अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिए कि वह उत्तराखंड राज्य की सहमति से इसकी निशानदेही सर्वे ऑफ इंडिया जैसी एजेंसी से करवाए, ताकि खनन को रोकने के लिए प्रभावी आदेश पारित किए जा सकें। याचिका में गुहार लगाई गई है कि वेटलैंड के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगाई जाए और इसके लिए राज्य सरकार की ओर से जारी लाइसेंस को रद्द किया जाए।
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बता दें कि आर्द्रभूमि इस तरह का भूमि क्षेत्र है जिसमें या तो स्थायी रूप या मौसमी रूप से पानी होता है, और यह एक विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र की विशेषताओं को ग्रहण करता है। शीर्ष अदालत ने पाया था कि कई आर्द्रभूमि और झीलें गायब हो गई हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने देश में दो लाख से अधिक आर्द्रभूमि की पहचान की है, जिसने 2011 में एक राष्ट्रीय आर्द्रभूमि एटलस तैयार किया था और 2,01,503 आर्द्रभूमि की मैपिंग की गई थी। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा था कि केंद्र सरकार सभी 2,01,503 आर्द्रभूमियों की सुरक्षा के लिए सूची तैयार करे और राज्य सरकारों के परामर्श से अधिसूचित करे। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिए थे कि संबंधित उच्च न्यायालय इसकी देखरेख करें। हाईकोर्ट के दखल के बाद प्रदेश सरकार ने वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम 2017 बनाए। सरकार ने 15 जून 2017 को राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया, जिसका कार्य आर्द्रभूमियों की पहचान और संरक्षण करना था।

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