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High Court: दुर्गम क्षेत्रों में कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मी के तबादले के लिए पद खाली न होने का तर्क वैध नहीं

Sat, 07 Feb 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 07 Feb 2026 05:00 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई कर्मचारी कठिन, जनजातीय या दुर्गम क्षेत्रों में निर्धारित कार्यकाल पूरा कर लेता है, तो विभाग पद खाली नहीं होने की वजह से उसका आवेदन रद्द नहीं कर सकता है। 

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High Court said that the argument that there are no vacant posts available is not valid for transferring empl
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई कर्मचारी कठिन, जनजातीय या दुर्गम क्षेत्रों में निर्धारित कार्यकाल पूरा कर लेता है, तो विभाग पद खाली नहीं होने की वजह से उसका आवेदन रद्द नहीं कर सकता है। पद खाली नहीं होने का तर्क वैध नहीं है और न ही विभाग कर्मचारी को उसके मनपसंद स्टेशन पर तैनाती देने से इन्कार कर सकता है। याचिकाकर्ता कुल्लू जिले के कठिन क्षेत्र समेज स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता (डीपीई) पद पर 2021 से सेवारत है। याचिकाकर्ता ने स्थानांतरण नीति के अनुसार दो सर्दियां और तीन गर्मियां बिताने का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस पर उन्होंने विभाग के समक्ष एक प्रतिवेदन दिया, जिसमें अपनी पसंद के पांच स्टेशनों का विकल्प दिया था, लेकिन सक्षम प्राधिकारी ने 27 जनवरी को उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनकी ओर से मांगे गए 30 किमी दायरे में कोई पद खाली नहीं है। इसके बाद उन्हें शिमला जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल थरोला भेज दिया गया।

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याचिकाकर्ता को पांच स्टेशनों की नई सूची हफ्ते में देने के निर्देश
अदालत ने पाया कि विभाग ने याचिकाकर्ता की पसंद के स्टेशनों पर उन कर्मियों पर विचार नहीं किया जोकि लंबे समय से वहां डटे हैं। न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की पीठ ने सविता बनाम हिमाचल प्रदेश जैसे पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट ने पहले ही स्थिति स्पष्ट की है कि कठिन क्षेत्रों से आने वाले कर्मियों को उनकी पसंद के स्टेशनों पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अगर वहां पद खाली नहीं है, तो लंबे समय से टिके हुए कर्मचारी को हटाकर याचिकाकर्ता को वहां तैनात किया जाना चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह एक हफ्ते के भीतर पांच स्टेशनों की नई सूची विभाग को सौंपे। इन पांच स्टेशनों में से एक स्टेशन दूसरे जिले का अनिवार्य है। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को इस प्रतिवेदन पर दो हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट के फैसले से उन हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं पूरी करने के बाद मनचाही पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।

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