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बुजुर्गों के कल्याण को बने कानून लागू नहीं करने पर सरकार से जवाब तलब

Tue, 26 May 2020 07:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 26 May 2020 07:33 PM IST
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high court ask for reply from the govt for not implementing the law made for the welfare of the elderly
हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल हाईकोर्ट ने बुजुर्गों के कल्याण के लिए बनाए कानून प्रदेश में लागू न करने पर केंद्र और प्रदेश सरकार से एक सप्ताह में जवाब तलब किया है। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव की ओर से दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद ये आदेश पारित किए। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार वर्ष 2007 मे केंद्र सरकार ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम बनाया था। इसके तहत बुजुर्गों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं हैं, लेकिन 13 वर्ष बीतने के बावजूद राज्य सरकार ने इसे लागू नहीं किया।

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इससे बुजुर्गों को कई लाभों से वंचित होना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार वैश्विक महामारी कोविड -19 के कारण केंद्र और राज्य सरकार की ओर से बुजुर्गों की आवाजाही पर लगाए प्रतिबंधों के समय में उन्हें वर्ष 2007 के केंद्रीय कानून का लाभ नहीं मिल पा रहा। सरकार ने वर्ष 2001 में अभिभावक एवं आश्रित भरण पोषण कानून बनाया था, जो पुराना हो चुका है। उससे बेहतर और कहीं ज्यादा व्यापक 2007 में बना केंद्रीय कानून है। इसलिए याचिकाकर्ता ने अदालत से प्रार्थना की है कि वर्ष 2001 के राज्य सरकार के कानून को रद्द कर 2007 के केंद्रीय कानून को लागू किया जाए।

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