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Shimla Kalka Railway Track: 120वें साल में प्रवेश कर गया हेरिटेज शिमला-कालका रेलवे ट्रैक

Wed, 09 Nov 2022 10:36 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 09 Nov 2022 10:36 AM IST
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सार
ब्रिटिश शासनकाल में 9 नवंबर 1903 को यातायात के लिए खोले गए इस ट्रैक के 119 साल पूरे के उपलक्ष्य पर शिमला रेलवे स्टेशन को मंगलवार रात रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया।
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Heritage Shimla-Kalka railway track entered in 120th year
हेरिटेज शिमला-कालका रेलवे ट्रैक - फोटो : संवाद

विस्तार

ऐतिहासिक शिमला-कालका रेल ट्रैक बुधवार को 120वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। ब्रिटिश शासनकाल में 9 नवंबर 1903 को यातायात के लिए खोले गए इस ट्रैक के 119 साल पूरे के उपलक्ष्य पर शिमला रेलवे स्टेशन को मंगलवार रात रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया। बुधवार को 120वें वर्ष में प्रवेश करने को लेकर रेलवे की ओर से कई कार्यक्रम रखे गए हैं। शिमला-कालका रेलवे का इतिहास काफी पुराना है। 1864 में अंग्रेजों ने शिमला को अपनी शीतकालीन राजधानी बनाया था। इसके बाद कलकत्ता से शिमला आने के लिए कालका से इस नैरोगेज रेल लाइन को बिछाने की योजना बनाई गई।



इस रेल लाइन के लिए सबसे पहले वर्ष 1884 में सर्वे करवाया गया था। हालांकि, इसके बाद कई और सर्वे भी हुए। वर्ष 1898 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और 1903 में काम पूरा होने पर इसे यातायात के लिए खोला गया। रेल से लाए जाने वाले माल को शहर तक पहुंचाने के लिए 1909 में इस रेल लाइन को पुराना शिमला (ओल्ड बसस्टैंड) तक बढ़ायागया। 8 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने इस ट्रैक को विश्व धरोहर का दर्जा दिया। विभाग इस ट्रैक पर अनेक सुविधाओं से लैस पारदर्शी पैनोरमिक कोच उतारने की तैयारी में है। जिसका कार्य आरसीएफ कपूरथला को सौंपा गया है।  


टनल के सिरे न मिलने पर अंग्रेज इंजीनियर ने कर ली थी आत्महत्या

रेल लाइन के निर्माण के दौरान बड़ोग टनल के दोनों सिरे न मिलने पर एक अंग्रेज इंजीनियर ने आत्महत्या कर ली थी। बाद में हिमाचल के सोलन के रहने वाले बाबा भलकू ने टनल के निर्माण के सर्वे में मदद की जिसके बाद इसका काम पूरा हो सका। शिमला-कालका रेल लाइन के निर्माण में बाबा भलकू का अहम योगदान रहा है।

ये है शिमला-कालका रेलवे की खासियत
- रेल लाइन की कुल लंबाई 96.60 किलोमीटर 
- रेल लाइन में कुल 20 स्टेशन 
- 103 टनल और 912 ब्रिज 
- रेल की स्पीड 25 से 30 किमी 
- बड़ोग में सबसे लंबी रेल 1143 मीटर टनल 

हेरिटेज रेलमार्ग के 119 वर्ष पूरे होने पर कालका में बुधवार को फोटो प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी कालका-शिमला ट्रैक की हसीन यादों को संजोती फोटो पर आधारित रहेगी। इसके साथ ही रेलवे सामुदायिक केंद्र में बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। 

1921 में महात्मा गांधी ने की थी यात्रा 
वर्ष-1896 में इस रेलमार्ग को बनाने का काम दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। कालका से शिमला तक का 96 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग पर 18 स्टेशन हैं। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।

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