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मां बालासुंदरी गोशाला में गाय के गोबर से बनाई जाएगी काष्ठ, डीसी ने किया मशीन का शुभारंभ
Fri, 17 Jan 2020 05:52 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 17 Jan 2020 05:52 PM IST
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गो काष्ठ मशीन
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल के सिरमौर जिले को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उपायुक्त डॉ. आरके परूथी ने माता बालासुंदरी गोशाला एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र में गाय के गोबर से काष्ठ (गोबर के उपले) बनाने के लिए गो काष्ठ मशीन स्थापित की है। उन्होंने बताया कि मशीन के प्रयोग से बनने वाली काष्ठ ईंधन का काम करेगी। यह ऊर्जा का एक सस्ता साधन है। इसके प्रयोग से कार्बन डाईआक्साइड के स्थान पर ऑक्सीजन पैदा होगी। यह अपशिष्ट पदार्थ को जैव उत्पाद में बदलने में सहायक होगी।
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वनों का भी संरक्षण होगा। प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है। इसका उद्देश्य जिला सिरमौर में निराश्रित पशुओं की संख्या कम करना है और जिले में बनी गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि पशुओं के गोबर से काष्ठ बनाकर कमाई के साधन के रूप में इस्तेमाल करें। डीसी ने बताया कि गोबर की एक काष्ठ की कीमत पांच रुपये निर्धारित की गई है। ये एक सप्ताह बाद माता बालासुंदरी गोशाला में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इसका इस्तेमाल सभी महत्वपूर्ण उद्योगों, मोक्षधाम, ईंट भट्ठे में ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
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गाय के गोबर से दीये, गमले व हवन सामग्री बनाने की मशीनें भी स्थापित की जाएगी। सहायक निदेशक पशुपालन नीरू शबनम ने बताया कि चार दिन पुराने दस किलो गोबर के इस्तेमाल से चार काष्ठ बन सकती हैं। एक काष्ठ का आकार लगभग 2.5 फीट लंबा और 2.5 इंच चौड़ा होगा। पशुपालकों से अपील की कि वे दूध न देने वाले पशुओं को न छोड़े। इनके गोबर और गोमूत्र से कई प्रकार के उत्पादों का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह व अन्य संस्थाओं से आग्रह किया है कि यदि वे गो काष्ठ बनाने का प्रशिक्षण लेना चाहते हैं तो माता बालासुंदरी गोशाला एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र में संपर्क कर सकते हैं।
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