बजट से उम्मीदः कम विद्यार्थी संख्या वाले स्कूलों को मर्ज कर मॉडल बनाने की जरूरत
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हिमाचल में शिक्षा क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए प्रदेश में विद्यार्थियों की कम संख्या वाले सरकारी स्कूल मर्ज कर मॉडल स्कूल बनाने का समय आ गया है। स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं देकर गुणात्मक शिक्षा देने के लिए सरकार को इस बार बजट में विशेष प्रावधान करना चाहिए। 50 बच्चों की संख्या वाले सूबे के सैकड़ों प्राइमरी और मिडल स्कूलों पर सालाना करोड़ों रुपये का खर्च आ रहा है।
निजी स्कूलों के फैलते जाल और सरकारी स्कूलों पर ताले लटकने से रोकने के लिए स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने, टीचर ट्रेनिंग पर ज्यादा जोर देने, स्मार्ट क्लासरूम और इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई शुरू करवाने पर भी बल देने की जरूरत है। छह मार्च को पेश होने वाले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के तीसरे बजट भाषण से शिक्षा क्षेत्र को बहुत ज्यादा उम्मीदें टिकी हुई हैं।सरकारी स्कूलों में सुधार लाने के लिए सरकार को कड़े कदम भी उठाने पड़ेंगे।
बेहतर परीक्षा परिणाम नहीं देने वाले शिक्षकों की जवाबदेही अनिवार्य तौर पर तय करनी होगी। मात्र चेतावनी देकर छोड़ने के चलते ही बीते कुछ सालों से परिणाम लगातार घट रहे हैं। नए शिक्षण संस्थान खोलने की जगह पहले से खुले स्कूलों को मजबूत करना होगा। 50 बच्चों से कम संख्या वाले स्कूलों को मर्ज कर एक मॉडल स्कूल बनाना चाहिए। इस मॉडल स्कूल का बड़ा भवन होना चाहिए। शिक्षकों का कोई भी पद इन स्कूलों में रिक्त नहीं होना चाहिए।
हिमाचल में सरकारी स्कूलों की स्थिति...
बड़े खेल मैदान सहित आधुनिक पुस्तकालय और लैब इन स्कूलों में बनानी चाहिए। इसके अलावा शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य लेने की प्रथा को बंद करना होगा। नई तबादला नीति को जल्द लागू कर शैक्षणिक सत्र के बीच में तबादले और सेवानिवृत्ति न करते हुए इसके लिए साल में एक तारीख तय करनी चाहिए। पढ़ाई करवाने के परंपरागत तरीकों को छोड़कर डिजिटल माध्यम से पढ़ाई करवाना शुरू करना चाहिए।। वोकेशनल शिक्षा देने के साथ-साथ लैंग्वेज लैब का प्रसार करने की भी जरूरत है। विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट सेल को मजबूत करने, कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट करवाने के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान करने की जरूरत है।
प्राथमिक स्कूल : 10623
माध्यमिक स्कूल : 1969
उच्च/वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल : 2776
डिग्री कॉलेज : 125
शिक्षा के लिए 25 फीसदी हो बजट
राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शिक्षा क्षेत्र के लिए 25 फीसदी बजट की मांग की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मॉडल अपनाकर स्कूलों में धनराशि व्यय करनी चाहिए। स्कूलों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था होनी चाहिए।
इंग्लिश मीडियम को दिया जाए बढ़ावा
पीजीटी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन कालटा ने सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम को पहली कक्षा से ही शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सभी मूलभूत सुविधाएं देने के लिए बजट में विशेष प्रावधान होना चाहिए।
मॉडल स्कूलों से बदलेगी तस्वीर
सीएंडवी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष चमनलाल शर्मा ने कहा कि मॉडल स्कूल बनाने से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलेगी। सभी सुविधाएं मिलने पर निजी स्कूलों की जगह अभिभावकों का रुख सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ेगा।