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Himachal: जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों के आपसी सहमति से अंतर जिला तबादलों को पांच फीसदी कैडर शर्त से छूट

Sat, 16 Mar 2024 11:19 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 16 Mar 2024 11:19 AM IST
सार

सरकार के इस फैसले से जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। अनुबंध सेवाकाल को जोड़कर पांच साल तक सेवाएं दे चुके शिक्षक इसके तहत पात्र होंगे। 

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Exemption from five percent cadre condition for inter-district transfers with mutual consent of JBT and C&V te
तबादला(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य सरकार ने जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों के आपसी सहमति से होने वाले अंतर जिला तबादलों को पांच फीसदी कैडर शर्त से छूट दे दी है। शुक्रवार को शिक्षा सचिव की ओर से इस बाबत प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को पत्र जारी किया गया। सरकार के इस फैसले से जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। अनुबंध सेवाकाल को जोड़कर पांच साल तक सेवाएं दे चुके शिक्षक इसके तहत पात्र होंगे। शिक्षकों की इन दोनों श्रेणियों के अन्य प्रकार के सभी अंतर जिला तबादलों पर जिलावार कैडर संख्या की पांच फीसदी शर्त लागू रहेगी।  बीते माह सरकार ने सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे 25 हजार जेबीटी और 18 हजार सीएंडवी शिक्षकों के सेवाकाल में सिर्फ एक बार अंतर जिला स्थानांतरण करने पर लगी रोक को हटाने का फैसला लिया था।

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जयराम सरकार के समय 20 नवंबर 2021 को जारी अधिसूचना पर लगाई गई रोक को सुक्खू सरकार ने हटाया था। बीते वर्ष नवंबर के दौरान बड़ी संख्या में तबादलों के आवेदन आने के चलते कुछ समय के लिए रोक लगाई गई थी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शिक्षकों की दोनों श्रेणियों की जिलावार कैडर संख्या का सिर्फ पांच प्रतिशत स्थानांतरण एक  वर्ष के दौरान करने को मंजूरी दे दी गई है। कुछ जिलों से स्पष्टीकरण के बाद सरकार ने अधिसूचना को संशोधित करते हुए आपसी सहमति से होने वाले अंतर जिला तबादलों को इस शर्त से बाहर कर दिया है। बता दें कि जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों के पहले 13 वर्ष का सेवाकाल पूरा होने पर दूसरे जिलों में तबादले होते थे। अब इस अवधि को घटाकर पांच वर्ष कर दिया गया है। अंतर जिला नीति के तहत स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों को अपने प्रार्थना पत्र संबंधित जिले के प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक के कार्यालय में जमा करवाने होंगे।

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सहकारी समितियों को देना होगा 3 फीसदी शिक्षा फंड
प्रदेश में अब सहकारी समितियों को अपने शुद्ध लाभांश से तीन फीसदी एजुकेशन फंड चुकाना पड़ेगा। राज्य सरकार ने कोआॅपरेटिव सोसायटी नियम 1971 के उपनियमों में संशोधन कर दिया है। पहली बार सहकारी समितियों से एजुकेशन फंड लेने का फैसला लिया गया है। शुक्रवार को इस बाबत सहकारिता विभाग की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई है। प्रदेश में 5247 सहकारी समितियां पंजीकृत हैं। नए वित्त वर्ष से एजुकेशन फंड लिए जाने का प्रावधान किया गया है। सहकारिता विभाग की ओर से अधिसूचित संशोधित अधिसूचना में बताया है कि अब प्रदेश में पंजीकृत प्रत्येक सहकारी समिति सहकारी शिक्षा निधि में योगदान करेगी। हर समिति को शुद्ध लाभ का तीन प्रतिशत इस निधि में योगदान करना होगा। इस फंड को समितियां अपने स्तर पर खर्च भी नहीं कर सकेंगी।

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इसके लिए रजिस्ट्रार कोआॅपरेटिव सोसायटी से मंजूरी लेना अनिवार्य रहेगा। संशोधित नियमों में स्पष्ट किया गया है कि नियमों में सहकारी शिक्षा निधि का गठन करने का प्रावधान किया गया है। निधि में योगदान प्रत्येक पंजीकृत सोसायटी द्वारा रुपये की दर से किया जाएगा। एक वर्ष में काम से प्राप्त शुद्ध लाभ का 300 रुपये या तीन फीसदी जो भी अधिकतम होगा, दिया जाना होगा। तीन फीसदी सहकारी शिक्षा निधि में से एक फीसदी हिमाचल प्रदेश सहकारी विकास महासंघ की ओर से और दो फीसदी सहकारी समितियों द्वारा अपने स्तर पर प्रस्तावित किया जाएगा। लाभ के अधिकतम तीन फीसदी से अधिक का योगदान करने की इच्छुक कोई भी समिति रजिस्ट्रार की पूर्व अनुमति से ऐसा कर सकेगी लेकिन यह किसी भी तरह से वर्ष के शुद्ध लाभ के पांच फीसदी से अधिक नहीं होगा।

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