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Research: व्यस्कों में पर्यावरण प्रदूषण से हृदय रोग होने का खतरा ज्यादा, आईआईटी मंडी के शोध में खुलासा

Wed, 29 Mar 2023 10:44 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Wed, 29 Mar 2023 10:44 PM IST
सार

आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने शोध के परिणामों में पाया कि पर्यावरण प्रदूषण दिल की गंभीर बीमारियों का सबसे खतरनाक कारण है। केवल स्वयं धूम्रपान करने वाले को ही खतरा नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान होने के कारण भी बहुत खतरा होता है। 

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Environmental pollution increases the risk of heart disease in adults, IIT Mandi research reveals
आईआईटी मंडी के शोधार्थी। - फोटो : संवाद

विस्तार

व्यस्कों में हृदय रोगों के सबसे खतरनाक कारणों का हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने पता लगाया है। उन्होंने शोध के परिणामों में पाया कि पर्यावरण प्रदूषण दिल की गंभीर बीमारियों का सबसे खतरनाक कारण है। केवल स्वयं धूम्रपान करने वाले को ही खतरा नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान होने के कारण भी बहुत खतरा होता है। इन बीमारियों के लिए अनुवांशिक कारण, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, डिप्रेशन भी बड़े कारण हैं। भारत में 45 वर्ष और अधिक उम्र के लोगों में हृदय रोगों (सीवीडी) के सबसे खतरनाक कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने डॉ. रमना ठाकुर के मार्गदर्शन में अध्ययन किया है। शोध के विवरण करंट प्रॉब्लम्स इन कार्डियोलॉजी (एल्सेवियर) इंपेक्ट फैक्टर : 16.464 नामक जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। आईआईटी मंडी के मानविकी और सामाजिक विज्ञान स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमना ठाकुर और रिसर्च स्कॉलर गायत्री और सुजाता ने मिल कर यह शोध पत्र तैयार किया है। 

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59 हजार से अधिक लोगों का किया विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने भारत के गांव और शहर दोनों के 45 वर्ष उम्र के 59,000 से अधिक लोगों के डाटा का विश्लेषण किया और बीमारी के सबसे खतरनाक कारणों का पता लगाया। अध्ययन में यह देखा गया कि भारत के उम्रदराज व्यस्कों में सीवीडी के प्रकोप और इसके बढ़ने के लिए पर्यावरण प्रदूषण एक खतरनाक कारण है। भारत की अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। खाना पकाने और ऐसे अन्य कार्यों के लिए प्रदूषण करने वाले ईंधन का उपयोग करती है। ऐसे ईंधन के जलने से हानिकारक धुआं निकलता है, जो लोगों की सेहत के लिए खतरनाक है। इस अध्ययन में शारीरिक श्रम, व्यायाम जैसे व्यवहार संबंधी सीवीडी के खतरनाक कारणों की भी पहचान की गई।
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स्वच्छ तकनीकों के उपयोग की सलाह
दिल के रोगों के खतरे को कम करने के लिए शोधार्थियों ने घर के अंदर वायु प्रदूषण कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस अध्ययन में कुछ सुझाव भी दिए हैं। इन तकनीकों के प्रयोग से सीवीडी की संभावना कम होगी।  इनके मुताबिक घरों में तरल पेट्रोलियम गैस, सौर, बिजली और बायोगैस जैसी स्वच्छ तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए। अधेड़ उम्र या वृद्धावस्था में भी हल्की से मध्यम शारीरिक गतिविधि करने से हृदय रोग और इससे मृत्यु का खतरा काफी कम होता है। शराब और तंबाकू के खतरों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम करना भी शराब-तंबाकू का चलन और सीवीडी की संभावना कम करने का कारगर उपाय हो सकता है।
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