भूकंप: छह दिन में दूसरी बार थर्राया हिमाचल का किन्नौर, जानें तीव्रता
किन्नौर में शाम करीब सात बजकर 16 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 आंकी गई और इसका केंद्र जमीन के अंदर 10 किलोमीटर गहराई पर था।
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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में शनिवार को फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानकारी के अनुसार शाम करीब सात बजकर 16 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 आंकी गई और इसका केंद्र जमीन के अंदर 10 किलोमीटर गहराई पर था। हालांकि भूकंप से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। इससे पहले छह फरवरी को भी किन्नौर में 4.1 की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। भूकंप से ऊरनी, चोलिंग और काकस्थल के समीप नेशनल हाईवे-5 पर पहाड़ी से चट्टानें गिरीं, जिससे करीब एक घंटा एनएच बाधित रहा था।
हिमाचल भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील वर्ग में आता है। 4 अप्रैल 1905 को हिमाचल में 7.8 तीव्रता वाला बड़ा भूकंप आ चुका है। इसके बाद हिमाचल में बड़े भूकंप अक्सर आते रहे हैं। 28 फरवरी 1906 को कुल्लू में 6.4 तीव्रता वाला भूकंप आया था। वर्ष 1930 में भी 6.10 तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसके बाद वर्ष 1945 में 6 और 1975 में 6.8 तीव्रता वाला भूकंप आया था। प्रदेश के चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, मंडी, बिलासपुर सिस्मिक जोन पांच और लाहौल स्पीति, शिमला, सिरमौर, सोलन जोन चार में आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को बेतरतीब निर्माण के बजाय भूकंपरोधी घर ही बनाने चाहिए ताकि आपदा के समय उनकी जिंदगी बच सके। कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अलसुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से एक लाख के करीब इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए थे।