Drone Policy: हिमाचल में फसलों के नुकसान का आकलन और सही लैंड रिकॉर्ड तैयार करेगा ड्रोन
प्रदेश के विभिन्न विभागों में ड्रोन की सहायता से कार्य करने की आईटी विभाग ने योजना तैयार की है। इसके तहत जीआईएस मैपिंग से ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। अवैध खनन, ट्रैफिक, बॉर्डर एरिया पर भी ड्रोन से नजर रखी जाएगी।
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हिमाचल प्रदेश में जल्द ही फसलों के नुकसान का आकलन और सही लैंड रिकॉर्ड को ड्रोन के माध्यम से तैयार किया जाएगा। प्रदेश के विभिन्न विभागों में ड्रोन की सहायता से कार्य करने की आईटी विभाग ने योजना तैयार की है। इसके तहत जीआईएस मैपिंग से ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। अवैध खनन, ट्रैफिक, बॉर्डर एरिया पर भी ड्रोन से नजर रखी जाएगी। ड्रोन नीति 2022 में प्रदेश सरकार ने इसका प्रावधान किया है। आईटी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में ड्रोन हर सेक्टर की जरूरत बनने वाला है। इसको देखते हुए ही सरकार ने कई बड़े महकमों का काम अब ड्रोन के माध्यम से करवाने का फैसला लिया है।
स्वामित्व योजना में ग्रामीण विकास के लिए अब सही लैंड रिकॉर्ड ड्रोन से तैयार किया जाएगा। योजनाओं के लिए जीआईएस मैपिंग भी ड्रोन से की जाएगी। सुरक्षा के लिए स्टेट और नेशनल बार्डर पर ड्रोन से नजर रखी जाएगी। आपदा के समय भी रियल टाइम मानीटरिंग के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। सड़क मार्ग बंद होने की स्थिति में आवश्यक सामान भी ड्रोन के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। वन क्षेत्रों में अवैध कटान, कब्जों और सड़क निर्माण को भी ड्रोन के माध्यम से देखा जाएगा। सड़कों की स्थिति का जायजा भी इस माध्यम से लिया जाएगा। पर्यटन स्थलों पर हुड़दंग की स्थिति ना बने, इसके लिए भी ड्रोन की मदद ली जाएगी।