फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Dr Nidhi Sharma presentation in Raj Bhavan Himachal Pradesh on drug use disorders

Himachal: माता-पिता में नशे की लत तो बच्चों में दो से तीन गुना नशेड़ी बनने का ज्यादा खतरा

Sun, 30 Apr 2023 09:30 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 30 Apr 2023 09:30 PM IST
सार

डॉ. निधि शर्मा ने कहा कि हिमाचल में राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा चिट्टा और भांग का इस्तेमाल हो रहा है।

विज्ञापन
Dr Nidhi Sharma presentation in Raj Bhavan Himachal Pradesh on drug use disorders
डॉ. निधि शर्मा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

माता-पिता में नशे की लत हो तो बच्चों में दो से तीन गुना नशेड़ी या नशे का रोगी बनने का ज्यादा खतरा हो जाता है। यानी अगर मां-बाप नशा करते हैं तो बच्चे भी आनुवांशिक कारणों से नशा करने लग जाते हैं। उनके मस्तिष्क की बनावट ही उस तरह की होने लगती है। किशोरावस्था या युवावस्था में मानसिक रोगों का उपचार न होना भी नशे का रोगी बनने का एक अन्य कारण है। यह बात आईजीएमसी शिमला के मनोचिकित्सा विभाग की सहायक प्रोफेसर एवं नशा रोग विशेषज्ञ डॉ. निधि शर्मा ने राजभवन शिमला में नशे पर प्रस्तुति देते हुए कही। डॉ. निधि ने कहा कि नशे से संबंधित रोगों और इसके पूरे इलाज वाले पहलू को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

विज्ञापन


दवाई देकर लगातार उपचार और परिजनों की काउंसलिंग से ही इसे काबू किया जा सकता है। इससे संबंधित मेडिकल उपचार के तीन चरण होते हैं। हर चरण में अलग दवाई और उपचार किया जाता है। शुरुआती उपचार में दोबारा नशा आ जाता है। मगर जैसे-जैसे इलाज आगे बढ़ता है तो दोबारा नशा लेने की दर कम होती जाती है और रोगी रिकवर होने लगता है। हिमाचल में राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा चिट्टा और भांग का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि भांग के इस्तेमाल में भी हिमाचल प्रदेश की स्थिति चिंताजनक है। आईजीएमसी शिमला के मनरोग विभाग में नशे के रोगियों का सफलता से उपचार किया जा रहा है। कई मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं।
विज्ञापन


छह साल में दर्ज मामलों की बात करें तो पकड़े गए मामले बढ़ गए : चौधरी
डीआईजी अपराध शाखा डीके चौधरी ने कहा कि छह वर्षों में भांग पर काम शुरू हुआ है। राज्य में भांग की खेती गैर कानूनी है। अगर देखें तो इसी प्रक्रिया के चलते हुए 40 फीसदी कैदी हिमाचल प्रदेश की जेलों में बंद हैं। प्रदेश में हेरोइन को मिक्स करके चिट्टा का बड़ा प्रचलन हो गया है। गैर कानूनी तरीके से भांग की खेती भी बढ़ गई है। चिट्टा खतरनाक नशीली दवा है। छह साल में दर्ज मामलों की बात करें तो पकड़े गए मामले बढ़ गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


राज्यपाल बोले, नशे के खिलाफ जनांदोलन खड़ा करने की जरूरत
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि नशे के खिलाफ एक जनांदोलन खड़ा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल पुलिस को ही इसे नियंत्रित करने के लिए जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए सामाजिक स्तर पर बड़ा अभियान चलाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने उन्हें कहा कि नशे की प्रवृत्ति को रोककर हिमाचल की पवित्रता को बचाने का प्रयास किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed