CSIR Research: औषधीय पौधे हड्डजोड़ और निरगुंडी मिटाएंगे जोड़ों का दर्द, सीएसआईआर ने तैयार की दवाई
हड्डियों के जोड़ों के दर्द से निजात दिलाने के लिए सीएसआईआर एवं हिमाचल जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर ने पारंपरिक औषधीय पौधों से एक दवाई तैयार की है।
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हिमाचल प्रदेश में पाए जाने वाले औषधीय पौधे हड्डजोड़ और निरगुंडी जोड़ों के दर्द का निवारण करेंगे। वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर) पालमपुर ने शोध कर इन औषधीय पौधों से दर्द निवारक दवाई तैयार कर ली है। इस दर्द निवारक दवाई का पशुओं पर सफल प्रयोग हो चुका है, जबकि अब इंसानों पर इसके इस्तेमाल की प्रक्रिया जल्द शुरू की जा रही है। जानकारी के अनुसार हड्डियों के जोड़ों के दर्द से निजात दिलाने के लिए सीएसआईआर एवं हिमाचल जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर ने पारंपरिक औषधीय पौधों से एक दवाई तैयार की है।
सीएसआईआर संस्थान में इस दवाई के शोध की देखरेख कर रहे डॉ. नरेंद्र त्रिपुडे ने कहा कि यह दवाई क्रीम और पाउडर दोनों रूप में मिलेगी। इस दवा के लगाने और खाने में कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। इस दवाई की तकनीक जालंधर की एक कंपनी को हस्तांतरित की गई है। उम्मीद है कि संस्थान करीब दो माह के अंदर राजीव गांधी आयुर्वेदिक स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान पपरोला में इस दवाई का प्रयोग इंसानों पर करेगा। कंपनी इस दवाई को बना तो सकती है, लेकिन सीएसआईआर जब तक इंसानों पर दवाई का सफल प्रयोग नहीं होता, तब तक कंपनी इस दवा को बाजार में नहीं उतार सकती। बताया जा रहा है कि इसमें करीब अभी छह माह लग सकते हैं। दवाई का नाम और कीमतें कंपनी तय करेगी।
जालंधर की कंपनी को हस्तांतरित की तकनीक: निदेशक
सीएसआईआर पालमपुर के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि जोड़ों के दर्द से निजात दिलाने के लिए संस्थान ने औषधीय पौधों से एक शोध कर दवाई तैयार की है। दवाई की तकनीक कंपनी को हस्तांतरित कर दी गई है।