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सीपीआरआई शिमला: बीमारी रोधक बीज से बढ़ेगी आलू, गेहूं और धान की पैदावार

Tue, 07 Dec 2021 11:26 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 07 Dec 2021 11:26 AM IST
सार

 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक फसली नुकसान से बचाने के लिए बीमारी रोधक बीज विकसित कर रहे हैं। हाईब्रीड बीज से फसलों की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आर्थिकी भी सुधरेगी। वैज्ञानिक दो साल के भीतर आलू का हाईब्रीड बीज विकसित कर लेगी ताकि फसल में बीमारियों और वायरस की मार न पड़ सके। 

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CPRI Shimla: Potato, wheat and paddy yield will increase with disease resistant seeds
केंद्रीय आलू अनुसंधान परिषद (सीपीआरआई) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के किसानों को आने वाले समय में अब आलू, गेहूं और धान का बीमारी रोधक बीज मिलेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक फसली नुकसान से बचाने के लिए बीमारी रोधक बीज विकसित कर रहे हैं। हाईब्रीड बीज से फसलों की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आर्थिकी भी सुधरेगी। केंद्रीय आलू अनुसंधान परिषद (सीपीआरआई) के वैज्ञानिक दो साल के भीतर आलू का हाईब्रीड बीज विकसित कर लेगी ताकि फसल में बीमारियों और वायरस की मार न पड़ सके। 

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सोमवार को सीपीआरआई में देश भर के 200 वैज्ञानिकों ने चिंता जताई कि देश में हर साल बीमारियों से फसलों को 65 मिलियन टन का नुकसान होता है। बागवानी फसलों को यह क्षति 70 फीसदी तक होती है। अन्य देशों की तुलना में भारत में 467 ग्राम प्रति हेक्टेयर कीटनाशक दवाएं उपयोग होती हैं। इन दवाओं की 60 फीसदी तक खपत कपास में होती है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि  केंद्र सरकार वैज्ञानिकों से सलाह लेकर कीटनाशक नीति निर्धारित करे। 
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सीपीआरआई में सोमवार को खाद्य सुरक्षा के लिए पौधों की बीमारियों पर नियंत्रण और प्रबंधन पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई है। मुख्य अतिथि कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डॉ. एचके चौधरी ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को फसलों पर लगने वाले रोगों से निपटने के लिए लैब और खेतों पर बारीक नजर रखने की जरूरत है।  

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33 करोड़ लोगों की जरूरत हो सकती है पूरी 

कार्यशाला में डॉ. पीके चक्रवर्ती ने कहा कि देश में उपयोग होने वाले कीटनाशकों में से 60 फीसदी कपास की खेती में प्रयोग होते हैं। फसल को रोगों से बचाकर 33 करोड़ लोगों की जरूरत पूरी हो सकती है। डॉ. बीएल जलाली ने कहा कि फसलों पर बीमारियां लगने से हर साल करीब 25 से 30 फीसदी फसलें तबाह होती हैं। कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक सहित अन्य आधुनिक कृषि तकनीकों से उत्पादन बढ़ा सकते हैं। सीपीआरआई के निदेशक डॉ. एनके  पांडे ने भी इस दौरान अपने विचार रखे।

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