Shimla: कुफरी नीलकंठ आलू किस्म किसानों को करेगी मालामाल, सीपीआरआई शिमला ने की विकसित
सीपीआरआई शिमला की ओर से विकसित आलू की कुफरी नीलकंठ किस्म मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड के किसानों को मालामाल करेगी।
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केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला की ओर से विकसित आलू की कुफरी नीलकंठ किस्म मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड के किसानों को मालामाल करेगी। औषधीय गुणों वाली इस किस्म का 150 क्विंटल बीज सीपीआरआई ने झारखंड के आदिवासी इलाकों के किसानों को उपलब्ध करवाया है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार सहित अन्य राज्यों के लिए भी सीपीआरआई ने कुफरी नीलकंठ किस्म को अनुशंसित किया है। यह राज्य भी सीपीआरआई से कुफरी नीलकंठ बीज ले सकेंगे।
जनजातीय उप योजना के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान झारखंड के रांची के किसानों को 150 क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया गया। सीपीआरआई शिमला के सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि संस्थान ने बैंगनी रंग की स्वदेशी आलू की किस्म कुफरी नीलकंठ विकसित की है।यह किस्म पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के लिए अनुशंसित की गई है। डॉ. आलोक ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान किसानों को आलू की बुआई के सही तरीके और भंडारण विधि से भी अवगत करवाया गया है।
कैंसर से लड़ने में सहायक, उत्पादन भी अधिक
आलू की यह किस्म कैंसर से लड़ने में सहायक है। बाहर से बैंगनी या नीला दिखने वाले इस आलू का गूदा क्रीमी या सफेद रंग का होता है। इस में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं। इसमें कैरोटिन एंथोसाइनिन नामक तत्व होता है, जिसके कारण यह शरीर में फ्री रेडिकल्स को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कुफरी नीलकंठ की गुणवत्ता बेहतरीन है और इसकी कीमत भी अच्छी मिल रही है। जहां सामान्य आलू का उत्पादन 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है, वहीं नीलकंठ किस्म का उत्पादन 400 से 450 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है।