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जनसेवा के लिए छोड़ दी एमडी की पढ़ाई, मैदान में डटे हैं डॉ. देयोल
Sat, 13 Jun 2020 10:12 AM IST
अरविन्द ठाकुर
सुरेश तोमर, अमर उजाला नेटवर्क, पांवटा साहिब (सिरमौर)
सुरेश तोमर, अमर उजाला नेटवर्क, पांवटा साहिब (सिरमौर)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 13 Jun 2020 10:12 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना संकट के बीच एक चिकित्सक ने एमडी मेडिसिन की पढ़ाई के लिए चयन होने के बावजूद जनसेवा को ही प्राथमिकता दी है। डॉ. अजय देओल पांवटा में कार्यकारी बीएमओ के पद पर दिन-रात सेवाएं देकर कोराना वॉरियर्स की तरह काम कर रहे हैं। अब तक सिविल अस्पताल पांवटा के चिकित्सकों की टीम के साथ मिलकर बाहरी राज्यों से पहुंचने वाले और स्थानीय सैकड़ों लोगों के कोविड-19 टेस्ट करवा चुके हैं।
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डॉ. देयोल इस वर्ष से आईजीएमसी शिमला से एमडी करने वाले थे। एमडी के लिए चयन भी हो गया। फीस जमा होने के साथ सभी अन्य औपचारिकताएं हो गई थीं। 4 मई को आनलाइन 3 विषय भर कर भेजने थे लेकिन, डॉक्टर देयोल की बतौर कार्यकारी बीएमओ राजपुर कोविड-क्वारंटीन सेंटर पांवटा में ड्यूटी लगी है।
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डॉ. देयोल ने अपने कॅरिअर को आगे बढ़ाने की जगह जनसेवा को तवज्जो दी है। डॉ. अजय देयोल मूल रूप से यूपी के शामली निवासी हैं। मेरठ मेडिकल कॉलेज से शिक्षा के बाद 1999 से मंडी सरकाघाट में बतौर चिकित्सक सेवाएं दीं। वर्ष 2007 से सिरमौर के राजपुर-भगानी क्षेत्रों में सेवारत रहे हैं।
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संक्रमित लोगों को पहले कोविड अस्पताल सोलन, अब सराहां और त्रिलोकपुर के लिए 108 एंबुलेंस से भेजने की खुद मौके पर पहुंच कर पूरी व्यवस्था करते हैं। स्थानीय विधायक समेत कई संस्थाओं भी उन्हें प्रशस्ति पत्र से सम्मानित कर चुकी हैं।
वहीं, बीएमओ राजपुर डॉ. अजय देयोल ने कहा कि इस वर्ष एमडी के लिए चयन हो गया था। लेकिन, ऐसी संकट की घड़ी में जनता की सेवा करने का फैसला ज्यादा ठीक लगा। 4 अप्रैल से अब तक निरंतर पांवटा के क्वारंटीन सेंटरों में सेवाएं दे रहे हैं।