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यूजीसी के नियम ताक परः न पीएचडी और न दस साल का अनुभव, बन गए वीसी

Wed, 13 Jan 2021 10:33 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 13 Jan 2021 10:33 AM IST
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UGC rules violation: Neither PhD nor ten years of experience on became VC
इस्तीफा(सांकेतिक)

हिमाचल में उच्च शिक्षा देने वाले आठ निजी विवि ने कुलपतियों की नियुक्तियों के लिए यूजीसी के नियमों की खुलकर अवहेलना की है। विवि प्रबंधन ने कुलपतियों की नियुक्ति के लिए तय नियमों को दरकिनार कर ऐसे व्यक्तियों को कुलपति के पद पर बिठा दिया जो न पीएचडी थे या बतौर प्रोफेसर दस साल का अनुभव नहीं रखते थे। दो विवि ने तो यूजीसी से निर्धारित आयु का ख्याल रखने की जहमत नहीं उठाई। निजी शिक्षण नियामक आयोग की जांच ने इन विश्वविद्यालयों की पूरी पोल खोल कर रख दी है। विवि की मनमानी के लिए शिक्षा विभाग और सरकार भी बराबर जिम्मेवार हैं। आज तक इन विवि के कुलपतियों की जांच नहीं की गई। अब पहली बार हुई जांच में ही प्रदेश में चल रहे 16 निजी विश्वविद्यालयों में से आठ विवि के कुलपति अयोग्य पाए गए हैं।

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राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग की जांच रिपोर्ट के अनुसार पांच निजी विवि के कुलपति बिना पीएचडी किए ही प्रोफेसर नियुक्त हुए थे। प्रोफेसर के पद पर सेवाएं देते हुए इन्होंने पीएचडी की। इन कुलपतियों के पास बतौर प्रोफेसर दस साल सेवाओं का अनुभव भी नहीं था। दो कुलपतियों की 70 वर्ष से अधिक आयु थी और एक कुलपति के पास इस पद पर नियुक्त होने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ही नहीं थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार पांच कुलपति जब संबंधित विश्वविद्यालयों में बतौर प्रवक्ता नियुक्त हुए थे तो इन्होंने पीएचडी नहीं की थी। प्रोफेसर नियुक्त होने के लिए पीएचडी को अनिवार्य माना गया है।
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इन कुलपतियों पर गिरी गाज
निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग की जांच के चलते एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी, चितकारा , एमएमयू, इंडस इंटरनेशनल, शूलिनी, बाहरा, बद्दी और अरनी यूनिवर्सिटी के कुलपतियों को अपने पदों से इस्तीफे देने पड़े हैं।
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इटरनल यूनिवर्सिटी के वीसी को मिली राहत
इटरनल यूनिवर्सिटी के कुलपति को आयोग की जांच कमेटी ने अयोग्यता के दायरे से बाहर कर दिया है। विवि के कुलपति का पक्ष सुनने के बाद आयोग ने उन्हें बतौर कुलपति सेवाएं देने का फैसला लेते हुए राहत दी। इनके अलावा आईसीएफएआई विवि के कुलपति के मामले पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

अरनी विवि के नए कुलपति भी निकले अयोग्य
निजी विवि के कुलपतियों के खिलाफ शुरू हुई जांच से पहले ही अरनी विवि के कुलपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जांच प्रक्रिया में विवि में नए कुलपति को नियुक्त किया गया। आयोग ने नए कुलपति को भी अयोग्य बताया है। अरनी विवि से अब दूसरे कुलपति की भी छुट्टी हो गई है।


 

प्रदेश में उच्च शिक्षा दे रहे दो और निजी विश्वविद्यालयों इंडस और एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी के कुलपतियों ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं। निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग को इन दोनों विश्वविद्यालयों के चांसलरों ने ई-मेल भेजकर कुलपतियों के इस्तीफे देने की सूचना दी है। दोनों विवि के अयोग्य करार कुलपतियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई न किए जाने पर आयोग ने मंगलवार को चांसलरों को तलब किया था। चांसलरों ने आयोग के समक्ष पेश होने के बजाय ई-मेल भेजकर कुलपतियों के इस्तीफे की सूचना दी। आईसीएफएआई विवि के कुलपति ने आयोग को उन्हें अयोग्य बताए जाने के मामले की दोबारा जांच का आवेदन किया है। आयोग ने इनसे आवश्यक दस्तावेज तलब किए हैं।आयोग की सख्ती के बाद अब तक प्रदेश के आठ निजी विवि के कुलपति पद छोड़ चुके हैं।

आयोग ने बीते साल नवंबर में प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया जांचने का फैसला लिया था। जांच के लिए प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुनील गुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी बनी। कमेटी में तकनीकी विवि और क्लस्टर विवि के कुलपतियों को बतौर सदस्य शामिल किया। कमेटी ने 16 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का रिकॉर्ड जांचने के बाद दस कुलपतियों को अयोग्य करार दिया। मानव भारती विवि के खिलाफ जारी पुलिस कार्रवाई के चलते इस विवि की आयोग ने जांच नहीं की। जांच पूरी होते ही तीन कुलपतियों ने पद छोड़ दिया। सात कुलपतियों ने दोबारा आयोग से विचार करने का आवेदन किया। दूसरी बार छह विवि के कुलपति फिर अयोग्य पाए गए। एक को योग्य पाया। इन छह में से पांच ने अब इस्तीफे दे दिए हैं। एक कुलपति ने दोबारा जांच को आवेदन किया है।

अब निजी कॉलेजों के प्रिंसिपलों पर कसा शिकंजा
 नियामक आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने बताया कि अब निजी कॉलेजों के प्रिंसिपलों की नियुक्ति प्रक्रिया और शैक्षणिक योग्यता की जांच शुरू कर दी है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. वीसी एनके शारदा की अध्यक्षता में जांच कमेटी दस्तावेजों की जांच में जुटी है। कई प्रिंसिपलों की नियुक्तियां संदेह के घेरे में हैं। जनवरी अंत तक जांच पूरी होगी। इसके बाद निजी विवि में नियुक्त शिक्षकों की पड़ताल की जाएगी।

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