लिटफेस्ट के दूसरे दिन अनुच्छेद 370 की पैरवी, साहित्यकार बोले- कश्मीरियों से माफी मांगे केंद्र
खुशवंत सिंह लिटफेस्ट इस बार भी विवाद के कारण सुर्खियों में आ गया है। हिमाचल के सोलन जिले स्थित कसौली में चल रहे लिटफेस्ट के दूसरे दिन शनिवार को जहां कुछ बुद्धिजीवियों ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के निर्णय को गलत करार दिया, वहीं बुद्धिजीवियों की इस बात पर लिटफेस्ट के आयोजन स्थल के बाहर कुछ हिंदू संगठनों से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
लिटफेस्ट में पहुंचे वक्ताओं ने कहा कि जेएंडके में अनुच्छेद 370 पुन: बहाल कर केंद्र सरकार कश्मीरियों से माफी मांगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से भी इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की। पहले दिन पाकिस्तान पर दरियादिली के बाद लिटफेस्ट का दूसरा दिन जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार को कोसने में गुजरा।
कश्मीर पर चर्चा के दौरान पैराडाइज ऐट वार पुस्तक की लेखक राधा कुमार ने कहा कि कश्मीर के लोग आजादी चाहते हैं। उन्हें भारत सरकार की तरफ से थोपे जा रहे आदेश स्वीकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जो हालात बने हैं वे तभी सामान्य होंगे, जब केंद्र इस निर्णय को वापस ले। सिर्फ युद्ध और बंदूकों के दम पर लोगों के दिल नहीं जीते जा सकते हैं।
कश्मीर की समस्या राजनीतिक : तवलीन
साहित्यकार तलवीन सिंह ने कहा कि कश्मीर की समस्या राजनीतिक है। वहां के लोग पीओके के साथ मिलकर खुशियां बांटना चाहते हैं। उन्होंने आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर पर भी शक जताया।
राजनीतिक घराने अनुच्छेद 370 हटने से नाखुश
जम्मू-कश्मीर से भाजपा प्रवक्ता तुहिन ए सिन्हा ने कहा कि जेएंडके पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला की वजह से समस्या बना है। जम्मू-कश्मीर पर राजनीति करते आए परिवार अनुच्छेद 370 हटने से खुश नहीं हैं।
पाकिस्तान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाना होगा
जनरल अताहसनैन ने कहा कि पाकिस्तान पर सिर्फ युद्ध की ही रणनीति कारगर नहीं है। पड़ोसी देश पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना होगा। पीओके हासिल करना नया एजेंडा है जो कब खत्म होगा यह रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी नहीं जानते हैं।