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Shimla: अटॉर्नी जनरल की मौजूदगी में होगी एनएचएआई मामले की सुनवाई, जंगलों में मलबा फेंकने पर हाईकोर्ट सख्त
Thu, 10 Aug 2023 10:18 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 10 Aug 2023 10:18 AM IST
सार
एनएचएआई की ओर से अवैज्ञानिक तरीके से सुरंगें और राजमार्ग बनाने के मामले में अदालत ने अटॉर्नी जनरल को 21 अगस्त को तलब किया है। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई के ठेकेदार की ओर से जंगलों में मलबा फेंकने की शिकायत पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की लापरवाही से संबंधित मामले की सुनवाई अटॉर्नी जनरल की मौजूदगी में होगी। एनएचएआई की ओर से अवैज्ञानिक तरीके से सुरंगें और राजमार्ग बनाने के मामले में अदालत ने अटॉर्नी जनरल को 21 अगस्त को तलब किया है। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई के ठेकेदार की ओर से जंगलों में मलबा फेंकने की शिकायत पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।
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अदालत ने एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि फोरलेन निर्माण के दौरान जंगलों में मलबा फेंकने की एवज में जुर्माना भरने से मलबा गायब नहीं होता है। अदालत ने कहा था कि यह अकेला मामला नहीं है जहां एनएचएआई के गैर-जिम्मेदाराना आचरण पर शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर हिमाचल में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अवैज्ञानिक तरीके से सुरंगें और राजमार्ग बनाने पर अदालत ने संज्ञान लिया है।
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हाल ही में भारी बारिश से खासकर चंडीगढ़ से शिमला और मनाली राजमार्गों को हुए नुकसान पर अदालत ने अटॉर्नी जनरल को नोटिस दिया है। अदालत ने आदेश में कहा था कि प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
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भूस्खलन से राजमार्गों को काफी नुकसान हुआ है और विशेष रूप से चंडीगढ़-शिमला और चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूमि के कटाव से बाधित है। इससे सामान्य जीवन में काफी व्यवधान आया है। अदालत ने कहा कि समस्या की भयावहता को ध्यान में रखते हुए अटॉर्नी जनरल का पक्ष जानना जरूरी है।